जींद। हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ललित बत्तरा ने कहा कि मानवाधिकार प्रत्येक व्यक्ति के लिए समान रूप से लागू होते हैं। चाहे वह आम नागरिक हो या जेल में बंद कोई कैदी। कैदियों को उचित भोजन, स्वच्छ आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं, पैरोल और फरलो जैसी कानूनी सुविधाएं तथा परिवार से मिलने का अधिकार सुनिश्चित करना आवश्यक है। इन अधिकारों की सुरक्षा करना न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ललित बत्तरा सोमवार को मानवाधिकारों की सुरक्षा और जेलों में बंद कैदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लेने के उद्देश्य से सोमवार को जींद पहुंचे थे। मानवाधिकार आयोग की टीम ने जिला कारागार का निरीक्षण किा। निरीक्षण के दौरान आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्तरा के साथ मेंबर ज्यूडिशियल कुलदीप जैन, मेंबर डी. भाटिया, रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल संजय खंडूजा तथा असिस्टेंट रजिस्ट्रार पुनीत अरोड़ा उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम ने जेल प्रशासन से विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए यह जानकारी ली कि नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन तथा स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन द्वारा जारी की गई एडवाइजरी और दिशा-निर्देशों का किस प्रकार पालन किया जा रहा है। इसके साथ ही टीम ने जिला जेल में बंद अंडर ट्रायल और दोषी कैदियों के रहन-सहन, खान-पान, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा अन्य व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया।
जस्टिस ललित बत्रा ने कहा कि निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम ने जेल की रसोई (मेस) का भी निरीक्षण किया और खाद्य सामग्री के भंडारण, गुणवत्ता तथा स्वच्छता की स्थिति का जायजा लिया। इसके अलावा जेल अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित किया गया कि कैदियों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो रही है। गंभीर बीमारी के मामलों में कैदियों को सिविल अस्पताल, पीजीआई रोहतक या अन्य उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करने की प्रक्रिया की भी जानकारी ली गई। जस्टिस बत्रा ने कहा कि जेल केवल सजा का स्थान नहीं बल्कि सुधार का केंद्र भी होना चाहिए। उन्होंने बताया कि कैदियों के पुनर्वास और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए जेल में विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। आईटीआई के माध्यम से कैदियों को कारपेंटरी, सिलाई तथा अन्य तकनीकी ट्रेड्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि जेल से बाहर आने के बाद वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि पैरोल और फरलो से संबंधित व्यवस्थाओं में और अधिक सुधार की आवश्यकता है ताकि पात्र कैदियों को समय पर कानूनी लाभ मिल सके। आयोग इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है। मानवाधिकार आयोग की टीम के इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जेल में बंद प्रत्येक व्यक्ति के मानवाधिकारों की रक्षा हो तथा उन्हें सम्मानजनक जीवन की आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। निरीक्षण के दौरान जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गएए ताकि व्यवस्थाओं को और अधिक बेहतर बनाया जा सके।
मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ललित बत्तरा सोमवार को मानवाधिकारों की सुरक्षा और जेलों में बंद कैदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लेने के उद्देश्य से सोमवार को जींद पहुंचे थे। मानवाधिकार आयोग की टीम ने जिला कारागार का निरीक्षण किा। निरीक्षण के दौरान आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्तरा के साथ मेंबर ज्यूडिशियल कुलदीप जैन, मेंबर डी. भाटिया, रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल संजय खंडूजा तथा असिस्टेंट रजिस्ट्रार पुनीत अरोड़ा उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम ने जेल प्रशासन से विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए यह जानकारी ली कि नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन तथा स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन द्वारा जारी की गई एडवाइजरी और दिशा-निर्देशों का किस प्रकार पालन किया जा रहा है। इसके साथ ही टीम ने जिला जेल में बंद अंडर ट्रायल और दोषी कैदियों के रहन-सहन, खान-पान, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा अन्य व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया।
जस्टिस ललित बत्रा ने कहा कि निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम ने जेल की रसोई (मेस) का भी निरीक्षण किया और खाद्य सामग्री के भंडारण, गुणवत्ता तथा स्वच्छता की स्थिति का जायजा लिया। इसके अलावा जेल अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित किया गया कि कैदियों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो रही है। गंभीर बीमारी के मामलों में कैदियों को सिविल अस्पताल, पीजीआई रोहतक या अन्य उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करने की प्रक्रिया की भी जानकारी ली गई। जस्टिस बत्रा ने कहा कि जेल केवल सजा का स्थान नहीं बल्कि सुधार का केंद्र भी होना चाहिए। उन्होंने बताया कि कैदियों के पुनर्वास और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए जेल में विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। आईटीआई के माध्यम से कैदियों को कारपेंटरी, सिलाई तथा अन्य तकनीकी ट्रेड्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि जेल से बाहर आने के बाद वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि पैरोल और फरलो से संबंधित व्यवस्थाओं में और अधिक सुधार की आवश्यकता है ताकि पात्र कैदियों को समय पर कानूनी लाभ मिल सके। आयोग इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है। मानवाधिकार आयोग की टीम के इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जेल में बंद प्रत्येक व्यक्ति के मानवाधिकारों की रक्षा हो तथा उन्हें सम्मानजनक जीवन की आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। निरीक्षण के दौरान जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गएए ताकि व्यवस्थाओं को और अधिक बेहतर बनाया जा सके।



