बाढड़ा, 9 फरवरी : (): उपमंडल मुख्यालय पर आयोजित किसान महापंचायत में आज किसान नेताओं ने किसानों व कृषि की मौजूदा स्थिति पर सवालिया निशान खड़ा करते हुए अमेरिकी टे्रड डील पर बालते हुए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि अगर टे्रड डील रद्द नहीं हुई तो भारत का किसान तीन साल तक ही टिक पाएगा तथा उसके बाद उसे बर्बाद होने से कोई नहीं बचा सकता। पंचायत में सभी वक्ताओं ने सरकार पर खेतीबाड़ी व्यवस्था पर बढती पंूजीपति नीति व महंगी होती शिक्षा, चिकित्सा वापस लेने की मांग की।
कस्बे की अनाज मंडी में भारतीय किसान यूनियन की महांपचायत में पूर्व चेयरमैन छेलूराम भोपाली की अध्यक्षता में संचालित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि आज चिकित्सा व शिक्षा पर पंूजीपतियों का दबदबा बढ रहा है और अब सबकी नजरें केवल कृषि भूमि पर टिकी हैं। अमेरिकी ट्रेड डील के नाम पर किसानों, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। आज भारत विश्व का सबसे युवा देश है लेकिन हमारी खेतीबाड़ी व बाजार पर विदेशी कंपनियों को बढावा दिया है जा रहा है जिससे जल्द ही देश आर्थिक संकट व बेरोजगारी से भुखमरी की जगह पहुंच जाएगा। हमारी भूमि, हमारा पानी और फैसला विदेशी लोग करेंगे जिसको रोकने के लिए यह राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है जो 23 मार्च को बड़ा रोष प्रदर्शन में तब्दील होगा और फिर सारे राष्ट्र के किसान व बेरोजगार युवा संसद घेराव करेंगे।
किसान नेत्री ममता कादयान ने कहा कि आज ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को रोजगार देने के लिए बार बार परीक्षाएं देने के बाद भी नौकरी की स्थाई की गारंटी नहीं है वहीं अब बुजर्ग किसानों व माताओं की पेंशन को काटा जा रहा है। युवा कल्याण संगठन सरपंक्षक कमल प्रधान व किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय कंवीनर राजू मान ने कहा कि अब देश के युवा को देश बचाने के लिए आगे आना चाहिए। जिस प्रकार तीन कानूनों केा वापस लेने के लिए सब एकजुट हुए वहीं स्थिति फिर तैयार करनी होगी।
जजपा किसान प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष नरेश द्वारका ने कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान के साथ-साथ समाज से जुड़ी अन्य गंभीर समस्याओं पर भी सरकार को ध्यान देना होगा। उन्होंने बुढ़ापा पेंशन में की गई कटौती को तुरंत बहाल करने, निजी स्कूलों और निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही लूट पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि आम जनता पहले ही महंगाई की मार झेल रही है और शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे बुनियादी अधिकारों का निजीकरण जनता पर भारी पड़ रहा है। किसान पंचायत में मौजूद किसानों ने गुरनाम सिंह चढूनी की बातों का समर्थन करते हुए आंदोलन को मजबूती देने का संकल्प लिया। किसान महापंचायत कप्तान भीमसिंह द्वारका, जिला अध्यक्ष रविन्द्र सांगवान, श्योराण खाप अध्यक्ष बिजेन्द्र बेरला, कमल प्रधान भिवानी, किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय कंवीनर राजू मान, महंत राकेश गिरी, जिला अध्यक्ष नवीन कारी, राजकुमार हड़ौदी, किसान नेत्री ममता कादयान, प्रदेश महासचिव विजय पंचगावां, जिला पार्षद रविंद्र चरखी, मा. होशियार सिंह काकड़ौली, जिला प्रभारी ऋषिपाल उमरवास, हल्का अध्यक्ष विजय श्योराण काकङोली, नसीब कारी, मा. रघबीर श्योराण, जागेराम काकड़ौली, जिला प्रैस प्रवक्ता राजेंद्र हूई, दीपेश कारी, दलबीर संधू करनाल, उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल, तेजबीर कादयान, सूमेरसिंह, युवा अध्यक्ष विक्रम कसाना, धर्मवीर फोगाट, सन्नी गोपी, सुखवंत बेरला, संजीव काकङोली, गुरनाम सिंह,, रामपाल धारणी, धर्मवीर हङोदा, दीपक मोद इत्यादि ने संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि हमारा राष्ट्र पहले पूंजीपति व्यवस्था को लागू करता रहा तथा अब विदेशी कंपनियों को गरीब किसान का हित बेच रहा है। आजादी के बाद हमारा राष्ट्र आत्मनिर्भर बना हुआ था लेकिन अब सरकार रातोंरात किसानों के हितों को गिरवी रख रहा है। सांसद, विधायक, मंत्रियों को प्रतिमाह लाखों रुपयों का वेतन पेंशन मिलने के बावजूद जहाज, ईलाज केशलेस मुफ्त मिल रहा है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के किसान को आज नई नई शर्ते लगाकर उसकी पेंशन रोकी जा रही है। अमेरिका में किसानों को हमारी आमदनी से अधिक सब्सिडी भी दी जा रही है वहीं हमारे देश का किसान कर्ज की दलदल में धंस रहा है। बड़ा दुखी मन होता है जब खाद बीज से लेकर अनाज बेचाने तक हमें पुलिस स्टेशनों में लाईन बनाकर खड़ा होना पड़ रहा है। केन्द्र सरकार दावा कर रही है किसानों के हितों को आंच नहीं आने दी जाएगी लेकिन अब भी किसान एमएसपी, कृषि उपकरणों की सब्सिडी के लिए दर दर भटक रहा है। उन्होंने किसानों से सरकार नहीं चेती तो 23 मार्च को राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे तथा अगले चरण में संसद घेराव किया जाएगा। किसान महापंचायत के बाद सभी किसानों ने मंडी से लेकर उपमंडल कार्यालय पहुंच कर एसडीएम के माध्यम से सीएम को ज्ञापन भी भेजा।
कस्बे की अनाज मंडी में भारतीय किसान यूनियन की महांपचायत में पूर्व चेयरमैन छेलूराम भोपाली की अध्यक्षता में संचालित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि आज चिकित्सा व शिक्षा पर पंूजीपतियों का दबदबा बढ रहा है और अब सबकी नजरें केवल कृषि भूमि पर टिकी हैं। अमेरिकी ट्रेड डील के नाम पर किसानों, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। आज भारत विश्व का सबसे युवा देश है लेकिन हमारी खेतीबाड़ी व बाजार पर विदेशी कंपनियों को बढावा दिया है जा रहा है जिससे जल्द ही देश आर्थिक संकट व बेरोजगारी से भुखमरी की जगह पहुंच जाएगा। हमारी भूमि, हमारा पानी और फैसला विदेशी लोग करेंगे जिसको रोकने के लिए यह राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है जो 23 मार्च को बड़ा रोष प्रदर्शन में तब्दील होगा और फिर सारे राष्ट्र के किसान व बेरोजगार युवा संसद घेराव करेंगे।
किसान नेत्री ममता कादयान ने कहा कि आज ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को रोजगार देने के लिए बार बार परीक्षाएं देने के बाद भी नौकरी की स्थाई की गारंटी नहीं है वहीं अब बुजर्ग किसानों व माताओं की पेंशन को काटा जा रहा है। युवा कल्याण संगठन सरपंक्षक कमल प्रधान व किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय कंवीनर राजू मान ने कहा कि अब देश के युवा को देश बचाने के लिए आगे आना चाहिए। जिस प्रकार तीन कानूनों केा वापस लेने के लिए सब एकजुट हुए वहीं स्थिति फिर तैयार करनी होगी।
जजपा किसान प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष नरेश द्वारका ने कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान के साथ-साथ समाज से जुड़ी अन्य गंभीर समस्याओं पर भी सरकार को ध्यान देना होगा। उन्होंने बुढ़ापा पेंशन में की गई कटौती को तुरंत बहाल करने, निजी स्कूलों और निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही लूट पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि आम जनता पहले ही महंगाई की मार झेल रही है और शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे बुनियादी अधिकारों का निजीकरण जनता पर भारी पड़ रहा है। किसान पंचायत में मौजूद किसानों ने गुरनाम सिंह चढूनी की बातों का समर्थन करते हुए आंदोलन को मजबूती देने का संकल्प लिया। किसान महापंचायत कप्तान भीमसिंह द्वारका, जिला अध्यक्ष रविन्द्र सांगवान, श्योराण खाप अध्यक्ष बिजेन्द्र बेरला, कमल प्रधान भिवानी, किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय कंवीनर राजू मान, महंत राकेश गिरी, जिला अध्यक्ष नवीन कारी, राजकुमार हड़ौदी, किसान नेत्री ममता कादयान, प्रदेश महासचिव विजय पंचगावां, जिला पार्षद रविंद्र चरखी, मा. होशियार सिंह काकड़ौली, जिला प्रभारी ऋषिपाल उमरवास, हल्का अध्यक्ष विजय श्योराण काकङोली, नसीब कारी, मा. रघबीर श्योराण, जागेराम काकड़ौली, जिला प्रैस प्रवक्ता राजेंद्र हूई, दीपेश कारी, दलबीर संधू करनाल, उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल, तेजबीर कादयान, सूमेरसिंह, युवा अध्यक्ष विक्रम कसाना, धर्मवीर फोगाट, सन्नी गोपी, सुखवंत बेरला, संजीव काकङोली, गुरनाम सिंह,, रामपाल धारणी, धर्मवीर हङोदा, दीपक मोद इत्यादि ने संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि हमारा राष्ट्र पहले पूंजीपति व्यवस्था को लागू करता रहा तथा अब विदेशी कंपनियों को गरीब किसान का हित बेच रहा है। आजादी के बाद हमारा राष्ट्र आत्मनिर्भर बना हुआ था लेकिन अब सरकार रातोंरात किसानों के हितों को गिरवी रख रहा है। सांसद, विधायक, मंत्रियों को प्रतिमाह लाखों रुपयों का वेतन पेंशन मिलने के बावजूद जहाज, ईलाज केशलेस मुफ्त मिल रहा है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के किसान को आज नई नई शर्ते लगाकर उसकी पेंशन रोकी जा रही है। अमेरिका में किसानों को हमारी आमदनी से अधिक सब्सिडी भी दी जा रही है वहीं हमारे देश का किसान कर्ज की दलदल में धंस रहा है। बड़ा दुखी मन होता है जब खाद बीज से लेकर अनाज बेचाने तक हमें पुलिस स्टेशनों में लाईन बनाकर खड़ा होना पड़ रहा है। केन्द्र सरकार दावा कर रही है किसानों के हितों को आंच नहीं आने दी जाएगी लेकिन अब भी किसान एमएसपी, कृषि उपकरणों की सब्सिडी के लिए दर दर भटक रहा है। उन्होंने किसानों से सरकार नहीं चेती तो 23 मार्च को राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे तथा अगले चरण में संसद घेराव किया जाएगा। किसान महापंचायत के बाद सभी किसानों ने मंडी से लेकर उपमंडल कार्यालय पहुंच कर एसडीएम के माध्यम से सीएम को ज्ञापन भी भेजा।



