अंबाला। सनातन धर्म कॉलेज अंबाला कैंट में महान क्रांतिकारी पंडित चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि के अवसर पर विभिन्न कक्षाओं में उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आजाद के जीवन, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति से प्रेरित करना रहा। इस अवसर पर इतिहास विभाग के डॉ. मदन ने अपने संबोधन में बताया कि पंडित चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को भाबरा (वर्तमान मध्य प्रदेश) में हुआ था। उन्होंने विद्यार्थियों को आजाद के प्रारंभिक जीवन, उनके क्रांतिकारी तेवर और अंग्रेजी शासन के विरुद्ध उनके अदम्य साहस के बारे में विस्तार से अवगत कराया। आगे बताया कि हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (ऌफअ) की स्थापना 1924 में अंग्रेजी शासन को सशस्त्र क्रांति के माध्यम से समाप्त कर भारत में गणतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करने के उद्देश्य से की गई थी। असहयोग आंदोलन की वापसी के बाद क्रांतिकारी युवाओं में उत्पन्न निराशा ने इस संगठन के गठन को गति दी। उन्होंने बताया कि 1924 मे ऌफअ की स्थापना में राम प्रसाद बिस्मिल, सचिंद्रनाथ सान्याल और योगेश चंद्र चटर्जी की प्रमुख भूमिका रही, जबकि अशफाकुल्ला खाँ और पंडित चंद्रशेखर आजाद बाद में इसके अग्रणी स्तंभ बने। संगठन को संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से काकोरी ट्रेन एक्शन जैसी साहसिक कार्रवाइयाँ की गईं। डॉ. मदन ने विद्यार्थियों को अल्फ्रेड पार्क, इलाहाबाद में 27 फरवरी 1931 को आजाद द्वारा देश के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान का स्मरण भी कराया और कहा कि उनका जीवन साहस, अनुशासन और राष्ट्रनिष्ठा की अद्वितीय मिसाल है। इस अवसर पर इतिहास विभाग के सहायक प्रोफेसर ललित कुमार ने क्रांतिकारियों की विचारधारा और उनके राष्ट्रसमर्पित जीवन पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे महान क्रांतिकारियों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में देशभक्ति, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को अपनाएँ। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों ने पंडित चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
अंबाला में चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा



