जींद। जींद के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल रानी तालाब मंदिर के परिक्रमा मार्ग पर लगी कंक्रीट की ग्रिलें कई स्थानों से पूरी तरह से टूट चुकी हैं। जिससे श्रद्धालुओं के लिए परिक्रमा करना खतरे से खाली नहीं रह गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि कोई भी बच्चा या बुजुर्ग फिसलकर सीधे रानी तालाब में गिर सकता है जिससे किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। अग्रवाल समाज के अध्यक्ष डा. राजकुमार गोयल ने कहा कि रानी तालाब मंदिर में हर रोज श्रद्धालु दर्शन एवं परिक्रमा के लिए आते हैं। खासकर सुबह और सायंकाल के समय महिलाओंए बुजुर्गों और बच्चों की आवाजाही अधिक रहती है। टूटी ग्रिलों के कारण परिक्रमा मार्ग पर चलना जोखिम भरा हो गया है लेकिन अभी तक प्रशासन का इस ओर ध्यान नहीं है। गोयल ने इस गंभीर समस्या को लेकर जींद के डीसी मोहम्मद इमरान रजा का ध्यान आकर्षित करते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। गोयल ने कहा कि स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर निर्मित रानी तालाब मंदिर के चारों ओर बने परिक्रमा मार्ग की दोनों ओर लगी कंक्रीट की ग्रिलें कई जगह से पूरी तरह से टूट चुकी हैं। यदि समय रहते इनकी मरम्मत नहीं कराई गई तो कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। गोयल ने जींद के डीसी से मांग की है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए टूटी ग्रिलों की तत्काल मरम्मतए कमजोर हिस्सों को मजबूत करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए स्थायी समाधान करवाया जाए।
दो साल पहले भी टूटी थी रानी तालाब की ग्रिले
रानी तालाब की ग्रिलों के टूटने का मामला नया नहीं है। दो वर्ष पूर्व भी परिक्रमा मार्ग पर लगी ग्रिलें इसी तरह टूट गई थीं। उस समय भी समाजसेवी राजकुमार गोयल ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से कई बार मरम्मत की मांग की थी लेकिन लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों की अनदेखी के बाद मजबूरन राजकुमार गोयल ने सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराई थी। उसके बाद प्रशासन हरकत में आया था और ग्रिलों की मरम्मत करवाई गई थी। अब एक बार फिर वही स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गोयल का कहना है कि यदि इस बार भी समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सीएम विंडो लगाने पर मजबूर होना पडेगा।
दो साल पहले भी टूटी थी रानी तालाब की ग्रिले
रानी तालाब की ग्रिलों के टूटने का मामला नया नहीं है। दो वर्ष पूर्व भी परिक्रमा मार्ग पर लगी ग्रिलें इसी तरह टूट गई थीं। उस समय भी समाजसेवी राजकुमार गोयल ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से कई बार मरम्मत की मांग की थी लेकिन लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों की अनदेखी के बाद मजबूरन राजकुमार गोयल ने सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराई थी। उसके बाद प्रशासन हरकत में आया था और ग्रिलों की मरम्मत करवाई गई थी। अब एक बार फिर वही स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गोयल का कहना है कि यदि इस बार भी समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सीएम विंडो लगाने पर मजबूर होना पडेगा।
