पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (एचवीपीएनएल) को दिव्यांग कर्मचारियों के प्रति असंवेदनशील रवैये पर नाराजगी जताई। अदालत ने स्पष्ट किया कि दिव्यांग कर्मचारियों को भी सक्षम कर्मचारियों के समान तबादला विकल्प प्रदान किए जाएं।
कार्यालयों को दिव्यांगजनों के लिए सुलभ बनाने के निर्देश
जस्टिस हरप्रीत सिंह ब्राड ने आदेश दिया कि कार्यालय स्थानों को दिव्यांगजनों के लिए सुलभ बनाया जाए। उन्हें गृह जिले में तैनाती या सुविधानुसार स्थान पर काम करने का अवसर दिया जाए और निवास व कार्यस्थल के बीच की दूरी का ध्यान रखा जाए।दो महीने में पूरी करने और रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश
कोर्ट ने यह पूरी प्रक्रिया दो महीने के भीतर पूरी करने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए। मामला दो अभियंताओं की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया।याचिकाओं में सामने आई असमानता
याचिका में बताया गया कि सक्षम कर्मचारियों को 392 विकल्प मिले, जबकि पहले याची को केवल 15 और दूसरे को छह विकल्प ही दिए गए। हाईकोर्ट ने कहा कि यह न केवल दिव्यांग अधिकार अधिनियम, 2016 का उल्लंघन है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों व समानता के सिद्धांतों के खिलाफ भी है।जीवन का अधिकार सिर्फ अस्तित्व तक सीमित नहीं
जस्टिस ब्राड ने कहा, “अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार केवल अस्तित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सार्थक जीवन का अधिकार भी शामिल है।”खेल
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