परशुराम नगर, चांदनी चौक में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह अमर कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से कथा का श्रवण किया। कथा व्यास आचार्य सनातन चैतन्य जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भागवत महात्म्य के विभिन्न प्रसंगों की जानकारी दी।

कार्यक्रम की शुरुआत कथा यजमान रामदयाल चौहान, कमलेश चौहान, अमन कुमार, मास्टर तेजपाल शर्मा, भरत लाल, शिवशंकर चौरसिया, शिवदयाल चौहान, अनिल पांडेय और अग्निहोत्री द्वारा पोथी पूजन से हुई। इसके बाद कथा व्यास आचार्य सनातन चैतन्य जी महाराज का तिलक लगाकर और पुष्पमाला पहनाकर सम्मान किया गया।

शुकदेव मुनि और राजा परीक्षित की महिमा

आचार्य सनातन चैतन्य जी महाराज ने भागवत महात्म्य के तहत वक्ता और श्रोता की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत के प्रमुख वक्ता शुकदेव मुनि और श्रोता राजा परीक्षित उच्च कोटि के थे।

उन्होंने कहा कि शुकदेव मुनि अद्वितीय ब्रह्मज्ञानी महापुरुष थे। वे स्वयं ब्रह्म स्वरूप माने जाते थे। शुकदेव मुनि ने राजा परीक्षित को सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया।

आचार्य जी ने कहा कि राजा परीक्षित ने कथा का श्रवण पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ किया। इससे उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त हुआ और मुक्ति का मार्ग मिला।

भागवत कथा से मिलता है आध्यात्मिक मार्ग

आचार्य सनातन चैतन्य जी महाराज ने श्रद्धालुओं को Bhagwat Katha के महत्व के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि भगवान की कथा का श्रवण मनुष्य के जीवन को आध्यात्मिक दिशा देता है।

उन्होंने कहा कि कथा सुनने से मन को शांति मिलती है। साथ ही व्यक्ति का मन भक्ति और सकारात्मक विचारों से जुड़ता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धार्मिक आयोजनों में श्रद्धा के साथ भाग लेने का आह्वान किया।

9 अक्टूबर तक चलेगी कथा

परशुराम नगर, चांदनी चौक में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह अमर कथा का आयोजन 9 अक्टूबर तक किया जाएगा। कथा के आगामी प्रसंगों में सृष्टि रचना और मनु-शतरूपा की कथा सुनाई जाएगी।

इसके अलावा भागवत प्रसंग के अनुसार भगवान शिव और माता सती की कथा का भी वर्णन किया जाएगा। धार्मिक प्रसंगों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से कथा का श्रवण किया। आयोजन स्थल पर धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।