अंबाला। आयुष विभाग, अंबाला के अंतर्गत स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर बाड़ा में महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पेरिमेनोपॉज एवं मेनोपॉज तथा उनके लक्षणों में आयुर्वेदिक दिनचर्या एवं ऋतुचर्या की भूमिका विषय पर एक विशेष स्वास्थ्य जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. समिधा शर्मा, आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी ने महिलाओं को संबोधित करते हुए पेरिमेनोपॉज एवं मेनोपॉज की अवस्था को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद के अनुसार यह अवस्था राजोनिवृत्ति काल है, जो मुख्यत: वात दोष की वृद्धि से संबंधित होती है। इस दौरान महिलाओं में गर्मी लगना, नींद न आना, चिड़चिड़ापन, थकान, जोड़ों में दर्द, स्मृति की कमी, अनियमित ऋतु स्राव, चिंता एवं अवसाद जैसे लक्षण सामान्य रूप से देखने को मिलते हैं। डॉ. शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद में मेनोपॉज को कोई रोग नहीं बल्कि प्राकृतिक जैविक परिवर्तन माना गया है, जिसे उचित दिनचर्या, आहार-विहार एवं मानसिक संतुलन द्वारा सहज बनाया जा सकता है। उन्होंने दिनचर्या के अंतर्गत समय पर उठना, अभ्यंग, संतुलित व सुपाच्य आहार, नियमित योग, प्राणायाम एवं ध्यान को अत्यंत उपयोगी बताया। साथ ही ऋतुचर्या के पालन द्वारा ऋतु अनुसार आहार-विहार अपनाकर वात, पित्त एवं कफ दोषों का संतुलन बनाए रखने पर बल दिया। व्याख्यान के दौरान बताया गया कि आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाने से हार्मोनल असंतुलन, हड्डियों की कमजोरी, मानसिक तनाव एवं त्वचा संबंधी समस्याओं से बचाव संभव है। कार्यक्रम में महिलाओं की शंकाओं का समाधान भी किया गया। इस व्याख्यान के दौरान योग प्रशिक्षिका सोनिया शर्मा, डिस्पेंसर नसीब सिंह, पार्ट-टाइम कर्मचारी सनी तथा गांव की महिलाएं ज्योति, ममता एवं अन्य ग्रामवासी उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी बताया। करीब 60 लोगो ने इस शिविर का लाभ उठाया वि सभी को महिलाओं के लिए ताकत की दवाईयां मुफ्त वितरित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को आयुर्वेदिक सिद्धांतों के माध्यम से स्वस्थ एवं सशक्त जीवन की ओर प्रेरित करना रहा।