कृषि विज्ञान केंद्र, अंबाला के ने गॉंव पिलखनी में  फसल अवशेष प्रबंधन पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया । डॉ उपासना सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान ने बताया की इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को उनके खेतों में फसल अवशेष प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों से अवगत कराना है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और वायु प्रदूषण कम हो। केवीके अम्बाला वर्ष  2018 -19   से अम्बाला जिले के किसानो को फसल अवशेष प्रबंधन प्रोजेक्ट के माध्यम से प्रदर्शन, गांव, खंड, एवं जिले स्तर पर साथ ही कॉलेज एवं स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम करके फसल के अवशेषों को न जलाने के लिए प्रेरित कर रहा है । उन्होंने किसानो से आह्वान किया पिलखनी गांव को बर्निंग फ्री गांव बनाने में सभी किसान भाई सहयोग दे । कृषि वैज्ञानिक डॉ राजेंद्र सिंह, ने बताया इस जागरूकता पहल से पिलाखनी क्षेत्र में फसल अवशेष प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर सतत कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाने की उम्मीद जताई!  उन्होंने किसानो से आग्रह किया की फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलायें े सरफेस सीडर, सुपर सीडर, स्मार्ट सीडर, हैप्पी सीडर, शर्ब  मास्टर , पैडी स्ट्रॉ चॉपर, एम.बी प्लाऊ इत्यादि की जानकारी दी े सुपर एस एम एस या स्ट्रा चोपर से फसल अवशेषें को बारीक टुकड़ों में काटकर भूमि पर फैलाए जिससे खेत में नमी संरक्षित रहती है जोकि गेंहूं फसल के लिए लाभप्रद मानी जाती है । सरफेस सीडर, सुपर सीडर, स्मार्ट सीडर, हैप्पी सीडर द्वारा गेहूं की सीधी बुआई की जा सकती है जो की फसल अवशेष प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण सहायक है।   उन्होंने बताया कि फसल अवशेष को खेत में ही मिलाने से मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है और पारंपरिक तरीके से अवशेष जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान से बचा जा सकता है। कार्यकर्म में डॉ रमेश कुमार, डॉ विक्रम धीरेन्द्र सिंह भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल आयोजन सरपंच रजनीश बतरा के सहयोग से किया गया । कार्यक्रम में लगभग 50 किसानो ने भाग लिया। अंत में सभी किसानो ने कृषि विज्ञानं केंद्र के साथ मिल कर  इस मुहीम को सफल बनाने का आह्वान किया