जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के प्रबंधन और वाणिज्य विभाग में अध्ययनरत छात्रों ने विभाग से जुड़ी गंभीर शैक्षणिक समस्याओं को लेकर विभागाध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा। विद्यार्थियों ने ज्ञापन के माध्यम से प्रबंधन विभाग में लंबे समय से शैक्षणिक भ्रमण, इंडस्ट्रियल टूर, सेमिनार, वर्कशॉप एवं गेस्ट लेक्चर जैसे आवश्यक शैक्षणिक कार्यक्रमों के आयोजन न होने पर चिंता व्यक्त की।
एबीवीपी नेता मयंक बंसल ने बताया कि प्रबंधन जैसे व्यावसायिक एवं व्यवहारिक विषय में केवल कक्षा कक्ष में पढ़ाया गया सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नही होता बल्कि विद्यार्थियों को उद्योगों, संस्थानों एवं कार्यस्थलों का प्रत्यक्ष अनुभव मिलना अत्यंत आवश्यक है। दुर्भाग्यवश, बीते लंबे समय से प्रबंधन विभाग द्वारा किसी भी प्रकार का शैक्षणिक भ्रमण या इंडस्ट्रियल टूर आयोजित नहीं किया गया। जिसके कारण विद्यार्थियों को वास्तविक प्रबंधन प्रक्रियाओं को समझने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। इंडस्ट्रियल टूर प्रबंधन शिक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा है। इसके माध्यम से विद्यार्थी उद्योगों की कार्यप्रणाली, संगठनात्मक संरचना, मानव संसाधन प्रबंधन, उत्पादन प्रक्रिया, विपणन रणनीतियों एवं प्रशासनिक ढांचे को प्रत्यक्ष रूप से समझते हैं लेकिन इंडस्ट्रियल टूर के अभाव में विद्यार्थियों का ज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित रह गया है। जिससे उनका व्यावहारिक कौशल विकसित नहीं हो पा रहा। जिसमें विद्यार्थियों से पर वर्ष 200 रुपये लिए जाते है। एबीवीपी नेता अभिषेक ने बताया कि यह भी बताया कि विभाग में समय-समय पर सेमिनार, वर्कशॉप एवं गेस्ट लेक्चर आयोजित नहीं किए जा रहे हैं। सेमिनार एवं गेस्ट लेक्चर के माध्यम से उद्योग विशेषज्ञ, अनुभवी प्रबंधक एवं शिक्षाविद् विद्यार्थियों को आधुनिक प्रबंधन तकनीकों, नए विचारोंए स्टार्टअप संस्कृति, उद्यमिता एवं करियर अवसरों के बारे में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इन कार्यक्रमों की कमी के कारण विद्यार्थियों को न तो समसामयिक प्रबंधन ज्ञान मिल पा रहा है और न ही करियर मार्गदर्शन एवं प्लेसमेंट से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हो रही है। यह भी चिंता जताई कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी युग में प्रबंधन के विद्यार्थियों को केवल डिग्री ही नही बल्कि व्यावहारिक अनुभव, कौशल एवं उद्योग से जुड़ा ज्ञान भी आवश्यक होता है। यदि समय रहते इन शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन नहीं किया गया तो इसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों के भविष्य, रोजगार की संभावनाओं एवं करियर विकास पर पड़ेगा। प्रांत कार्यकारिणी सदस्य अमित सैनी ने बताया कि विभागाध्यक्ष से मांग की कि शीघ्र ही प्रबंधन विभाग के विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक भ्रमण एवं इंडस्ट्रियल टूर की योजना बनाई जाए ताकि विद्यार्थी उद्योगों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकें। इसके साथ ही नियमित अंतराल पर सेमिनार, वर्कशॉप, गेस्ट लेक्चर एवं करियर गाइडेंस कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक प्रबंधन शिक्षा से जोड़ा जा सके। विद्यार्थियों ने यह भी कहा कि यदि समस्याओं का समाधान समय रहते नहीं किया गया तो वे विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखने के लिए आगे की रणनीति बनाने को विवश होंगे।
एबीवीपी नेता मयंक बंसल ने बताया कि प्रबंधन जैसे व्यावसायिक एवं व्यवहारिक विषय में केवल कक्षा कक्ष में पढ़ाया गया सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नही होता बल्कि विद्यार्थियों को उद्योगों, संस्थानों एवं कार्यस्थलों का प्रत्यक्ष अनुभव मिलना अत्यंत आवश्यक है। दुर्भाग्यवश, बीते लंबे समय से प्रबंधन विभाग द्वारा किसी भी प्रकार का शैक्षणिक भ्रमण या इंडस्ट्रियल टूर आयोजित नहीं किया गया। जिसके कारण विद्यार्थियों को वास्तविक प्रबंधन प्रक्रियाओं को समझने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। इंडस्ट्रियल टूर प्रबंधन शिक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा है। इसके माध्यम से विद्यार्थी उद्योगों की कार्यप्रणाली, संगठनात्मक संरचना, मानव संसाधन प्रबंधन, उत्पादन प्रक्रिया, विपणन रणनीतियों एवं प्रशासनिक ढांचे को प्रत्यक्ष रूप से समझते हैं लेकिन इंडस्ट्रियल टूर के अभाव में विद्यार्थियों का ज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित रह गया है। जिससे उनका व्यावहारिक कौशल विकसित नहीं हो पा रहा। जिसमें विद्यार्थियों से पर वर्ष 200 रुपये लिए जाते है। एबीवीपी नेता अभिषेक ने बताया कि यह भी बताया कि विभाग में समय-समय पर सेमिनार, वर्कशॉप एवं गेस्ट लेक्चर आयोजित नहीं किए जा रहे हैं। सेमिनार एवं गेस्ट लेक्चर के माध्यम से उद्योग विशेषज्ञ, अनुभवी प्रबंधक एवं शिक्षाविद् विद्यार्थियों को आधुनिक प्रबंधन तकनीकों, नए विचारोंए स्टार्टअप संस्कृति, उद्यमिता एवं करियर अवसरों के बारे में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इन कार्यक्रमों की कमी के कारण विद्यार्थियों को न तो समसामयिक प्रबंधन ज्ञान मिल पा रहा है और न ही करियर मार्गदर्शन एवं प्लेसमेंट से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हो रही है। यह भी चिंता जताई कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी युग में प्रबंधन के विद्यार्थियों को केवल डिग्री ही नही बल्कि व्यावहारिक अनुभव, कौशल एवं उद्योग से जुड़ा ज्ञान भी आवश्यक होता है। यदि समय रहते इन शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन नहीं किया गया तो इसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों के भविष्य, रोजगार की संभावनाओं एवं करियर विकास पर पड़ेगा। प्रांत कार्यकारिणी सदस्य अमित सैनी ने बताया कि विभागाध्यक्ष से मांग की कि शीघ्र ही प्रबंधन विभाग के विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक भ्रमण एवं इंडस्ट्रियल टूर की योजना बनाई जाए ताकि विद्यार्थी उद्योगों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकें। इसके साथ ही नियमित अंतराल पर सेमिनार, वर्कशॉप, गेस्ट लेक्चर एवं करियर गाइडेंस कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक प्रबंधन शिक्षा से जोड़ा जा सके। विद्यार्थियों ने यह भी कहा कि यदि समस्याओं का समाधान समय रहते नहीं किया गया तो वे विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखने के लिए आगे की रणनीति बनाने को विवश होंगे।



