भारत-चीन अमेरिकी टैरिफ से निपटने के लिए किसी संयुक्त रणनीति पर विचार कर सकते हैं। संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता के दौरान अमेरिकी टैरिफ के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। हालांकि सरकार ने अभी इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोला है। चीन की तरफ से पहले संकेत दिए जा चुके हैं कि अमेरिकी टैरिफ से निपटने के लिए दोनों देशों को मिलकर कार्य करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 अगस्त से एक सितंबर के बीच जापान एवं चीन की यात्रा पर रहेंगे।
पहले वे जापान जाएंगे जहां वे भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इसके बाद 31 अगस्त को वे चीन जाएंगे तथा एक सितंबर को वहां एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान उनकी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक भी होने की संभावना है। इस बैठक में अमेरिकी टैरिफ के मुद्दे पर भी चर्चा होने की संभावना है। उधर, मंगलवार को विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने हालांकि इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि अभी यह कहना मुश्किल है कि दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान द्विपक्षीय बैठकों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अभी भी चल रही है।
मिसरी ने कहा कि प्रधानमंत्री की जापान यात्रा हिन्द प्रशांत क्षेत्र और उसके बाहर शांति, समृद्धि एवं स्थिरता की दिशा में दोनों देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि करेगी। उन्होंने कहा कि याता भारत-जापान संबंधों को मजबूत करेगी। इस दौरान क्वाड पर भी चर्चा होगी। बता दें कि क्वाड शिखर सम्मेलन साल के आखिर में भारत में शुरू होना है। पीएम जापान के प्रधानमंत्री इशिबा को इसमें आमंत्रित भी करेंगे। दूसरे विकल्पों की भी तलाश कर रहा भारत बता दें कि भारत से अमेरिका को 86 अरब डालर का निर्यात होता है लेकिन ट्रंप ने इस पर 27 अगस्त से 50 फीसदी शुल्क लगाने का ऐलान किया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे अमेरिका को होने वाला निर्यात 70 फीसदी तक गिर सकता है। ऐसे में भारत इसकी भरपाई के लिए दूसरे विकल्पों की भी तलाश कर रहा है। इसलिए चीन के साथ होने वाली वार्ता को इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अटकलें यहां तक कि भारत चीन के बिल्ट एंड रोड इनीसियेटिव (बीआरआई) में शामिल हो सकता है जिससे जरिये वह पूर्वी यूरोप एवं मध्य एशिया के देशों को निर्यात बढ़ा सकता है।
