भारत की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी मोदी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और अन्य मंत्रियों को 30 दिनों की हिरासत के बाद पद से हटाने के लिए तीन विधेयक पेश करने के कदम की कड़ी निंदा करती है। माकपा जिला सचिव सतीश सेठी ने कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला लोकतंत्र विरोधी है। क्योंकि देश के संविधान के तहत बने कानून मुताबिक जब तक किसी व्यक्ति पर आरोप सिद्ध न हो जाए तब तक उसे दोषी नहीं माना जा सकता। मात्र एफआईआर व गिरफ्तारी होने से कोई व्यक्ति दोषी नहीं बन जाता। दोषी कौन है और  निर्दोष कौन है ? यह न्यायिक प्रक्रिया से तय होता है। सेठी ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली मोदी सरकार की नव-फासीवादी प्रवृत्तियों से साफ है कि इस बिल का इस्तेमाल भी विपक्षी राज्य सरकारों व विरोधियो को निशाना बनाने के लिए एक हथियार के रूप में किया जाएगा। क्योंकि इससे पहले भी बीजेपी सरकार ने न्यायिक प्रक्रियाओ को नजरअंदाज कर ईडी (आर्थिक अपराध एजेंसी) को पीएमएलए ( धन शोधन निवरण अधिनियम) में अपार शक्तियां प्रदान कर रखी है। जिनमें किसी व्यक्ति को 30 दिन तो क्या 6 महीने से भी ज्यादा समय तक हिरासत में रखा जा सकता है। यह कई मामलो में प्रमाणित भी हो चुका है। सेठी ने कहा कि भृष्टाचार व अपराधिक आरोपों में शामिल होने वालो के खिलाफ देश में पहले से ही कानून व न्यायिक प्रक्रिया स्थापित है। परन्तु सरकार की मंशा न तो भृष्टाचार को खत्म करने की है और न ही इसमें शामिल लोगों को सजा दिलाने की है। देश की जनता ने देखा है कि किस प्रकार गृह मंत्री ने असम के हेमंत बिसवा शर्मा को देश का सबसे बड़ा भृष्टाचारी बताया था। परन्तु जैसे ही वह बीजेपी में शामिल हुए उन्हें भाजपा ने ही प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया। यही नहीं मोदी के शासनकाल में जिस प्रकार राजनैतिक विरोधियो की आवाज को दबाने, उन्हें भाजपा में शामिल करने व फंड उगाही के लिए ईडी का जो जमकर इस्तेमाल हुआ उसी प्रकार इन बिलों का भी दुरूपयोग होगा।  माकपा नेता ने बिल में प्रधानमंत्री पद को शामिल करने को हास्यस्पद बताते हुए कहा कि आज नए भारत में किस एजेंसी में इतनी पावर है जो प्रधानमंत्री को गिरफ्तार करना तो दूर उनकी राय के खिलाफ कुछ बोल भी सके। यह केवल भाजपा का ढोंग है। विधेयक में अपराध का उल्लेख तो केवल वास्तविक इरादे को छिपाने के लिए किया गया है। असल में यह  विपक्षी नेताओं को डराने व धमकाने के उदेश्य से ही लाए गए है। इसलिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी सदन से लेकर सड़क तक विधेयको का डटकर विरोध करेगी।