रेवाड़ी। जिला को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए 100 दिवसीय अभियान के तहत सामाजिक संस्था एमडीडी ऑफ इंडिया के सदस्यों ने डहीना ब्लॉक कार्यालय में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में बीडीपीओ करतार सिंह, एसईपीओ जसबीर चौधरी, सरपंच और सचिव विशेष रूप से मौजूद रहे।
एमडीडी ऑफ इंडिया टीम से जिला संयोजक जगदीप सिंह रावत और तुषार शर्मा ने बाल विवाह मुक्त भारत जागरूकता कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों को बाल विवाह मुक्त भारत की शपथ दिलवाई। जगदीप सिंह रावत ने बाल विवाह के खतरे, सबंधित कानून और रोकथाम के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले के 100 गांवों में आंगनबाड़ी, स्कूल और कॉलेज स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। गांवों में बाल कल्याण समितियां भी गठित की जा रही हैं, ताकि रेवाड़ी को पूर्ण रूप से बाल विवाह मुक्त बनाया जा सके। अभियान के तहत प्रशासन ने पुजारी, पाठी, पंच, सरपंच, नंबरदार, नगर पार्षद, बैंक्वेट हॉल, मैरिज पैलेस, धर्मशाला, कार्ड प्रिंटिंग प्रेस के संचालक, फोटोग्राफर, बैंड-बाजा और टेंट हाउस संचालकों को निर्देश दिए हैं कि विवाह से पहले दूल्हा-दुल्हन की उम्र की जांच अनिवार्य रूप से करें और किसी भी संदिग्ध बाल विवाह की सूचना तुरंत दें।
जिला समन्वयक ने बताया कि हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार लडक़ी की शादी की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और लडक़े की 21 वर्ष निर्धारित की गई है। इससे कम उम्र में शादी कराना दंडनीय अपराध है, जिसके लिए 2 वर्ष तक की कैद और 1 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान है। झूठी शिकायत करने पर भी कार्रवाई होगी। बाल विवाह की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 112, 1098, महिला हेल्पलाइन नंबर 181 और निकटतम पुलिस थाने, आंगनबाड़ी वर्कर को दी जा सकती है।
एमडीडी ऑफ इंडिया टीम से जिला संयोजक जगदीप सिंह रावत और तुषार शर्मा ने बाल विवाह मुक्त भारत जागरूकता कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों को बाल विवाह मुक्त भारत की शपथ दिलवाई। जगदीप सिंह रावत ने बाल विवाह के खतरे, सबंधित कानून और रोकथाम के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले के 100 गांवों में आंगनबाड़ी, स्कूल और कॉलेज स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। गांवों में बाल कल्याण समितियां भी गठित की जा रही हैं, ताकि रेवाड़ी को पूर्ण रूप से बाल विवाह मुक्त बनाया जा सके। अभियान के तहत प्रशासन ने पुजारी, पाठी, पंच, सरपंच, नंबरदार, नगर पार्षद, बैंक्वेट हॉल, मैरिज पैलेस, धर्मशाला, कार्ड प्रिंटिंग प्रेस के संचालक, फोटोग्राफर, बैंड-बाजा और टेंट हाउस संचालकों को निर्देश दिए हैं कि विवाह से पहले दूल्हा-दुल्हन की उम्र की जांच अनिवार्य रूप से करें और किसी भी संदिग्ध बाल विवाह की सूचना तुरंत दें।
जिला समन्वयक ने बताया कि हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार लडक़ी की शादी की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और लडक़े की 21 वर्ष निर्धारित की गई है। इससे कम उम्र में शादी कराना दंडनीय अपराध है, जिसके लिए 2 वर्ष तक की कैद और 1 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान है। झूठी शिकायत करने पर भी कार्रवाई होगी। बाल विवाह की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 112, 1098, महिला हेल्पलाइन नंबर 181 और निकटतम पुलिस थाने, आंगनबाड़ी वर्कर को दी जा सकती है।



