चंडीगढ़ के सेक्टर 36 स्थित एक नामी गर्ल्स कॉलेज में कथित ‘रेड वाइन रैगिंग’ का मामला चर्चा में है। आरोप है कि कॉलेज में बाहर से आई छात्राओं को सीनियर छात्राओं द्वारा ‘वेलकम पार्टी’ के बहाने मानसिक, भावनात्मक और कभी-कभी शारीरिक शोषण का सामना करना पड़ता है। इसमें शराब, विशेषकर रेड वाइन का उपयोग कर दबाव बनाने की घटनाएँ सामने आई हैं।

पूर्व छात्रा का आरोप है कि कॉलेज की आउटिंग्स के दौरान बीएमडब्ल्यू, ऑडी, मर्सिडीज जैसी लग्जरी गाड़ियों में बैठे बिगड़ैल युवकों द्वारा छात्राओं को घुमाने के बहाने पार्टियों में ले जाकर उन्हें नशीले पदार्थों के सेवन से प्रभाव में लेने की कोशिश की जाती है।

चंडीगढ़ में स्थानीय ‘गेड़ी’ संस्कृति जहाँ महंगी गाड़ियों में लड़कियों को परेशान किया जाता है, के बढ़ते प्रभाव ने चिंता बढ़ाई है। वहीं पुलिस पर भी सवाल उठे हैं कि कॉलेज से जुड़े कई संदिग्धों की सूची होने के बावजूद आउटिंग्स के समय निगरानी क्यों नहीं की जाती।

कॉलेज प्रिंसिपल ने आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि परिसर में सीसीटीवी कैमरे सक्रिय हैं, छात्राओं की गतिविधियों पर निगरानी रखी जाती है, और आउटिंग पर नियम लागू हैं। प्रिंसिपल का कहना है कि कॉलेज परिसर में शराब सेवन या रैगिंग की कोई घटना नहीं हुई है और नियमों का उल्लंघन करने वाली छात्राओं पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यह कहना है विशेषज्ञों का

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि छात्राओं को दबाव देकर शराब पिलाई जाती है, मानसिक शोषण या किसी प्रकार का अपराध किया जाता है, तो यह भारतीय दंड संहिता की धारा 328 (नशीला पदार्थ देकर नुकसान पहुँचाना), धारा 354 (महिला की लज्जा भंग), धारा 509 (अपमानजनक टिप्पणी) सहित अन्य धाराओं के अंतर्गत अपराध माना जा सकता है। साथ ही, ‘रैगिंग निषेध अधिनियम, 2009’ के तहत भी कठोर कार्रवाई संभव है।

यह मामला कॉलेज प्रशासन, पुलिस और अभिभावकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। चंडीगढ़ की आधुनिक छवि के बीच छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह निगरानी व्यवस्था मजबूत करे और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समुचित कानूनी कदम उठाए।