अमेरिका के भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाने पर एक मसौदा नोटिस जारी करने के बाद मंगलवार को शेयर बाजारों में चौतरफा बिकवाली हुई और प्रमुख शेयर सूचकांक सेंसेक्स 849 अंक टूटकर 81,000 अंक से नीचे आ गया। इसके अलावा विदेशी कोषों की लगातार बिकवाली और कमजोर वैश्विक रुझान ने भी निवेशकों की धारणा को कमजोर किया।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फेडरल रिजर्व के गवर्नर को बर्खास्त करने के बाद विदेशी कोषों की लगातार बिकवाली ने भी निवेशकों की धारणा को कमजोर किया। अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लागू करने के लिए एक मसौदा आदेश जारी किया है, जिसकी घोषणा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में की थी। यह अतिरिक्त शुल्क 27 अगस्त से लागू होगा। सेंसेक्स 849.37 अंक गिरकर 80,786.54 अंक पर बंद हुआ।
सेंसेक्स के 25 शेयर गिरावट के साथ और पांच शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। दिन के कारोबार में सेंसेक्स 949.93 अंक की भारी गिरावट के साथ 80,685.98 अंक पर आ गया था। निफ्टी 255.70 अंक टूटकर 24,712.05 अंक पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में यह 278.15 अंक की गिरावट के साथ 24,689.60 अंक पर आ गया था। रियल्टी, फार्मा, बैंकिंग और धातु शेयरों में बिकवाली का सबसे अधिक असर पड़ा, जबकि एफएमसीजी शेयरों ने मामूली बढ़त के साथ अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई।
सेंसेक्स के शेयरों में सन फार्मास्युटिकल, टाटा स्टील, ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एक्सिस बैंक, टेक महिंद्रा, अदाणी पोर्ट्स, टाइटन, बीईएल और लार्सन एंड टुब्रो में उल्लेखनीय गिरावट हुई। दूसरी ओर हिंदुस्तान यूनिलीवर, मारुति सुजुकी इंडिया, आईटीसी, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। निर्यात-संवेदनशील क्षेत्रों पर भारी असर पड़ा जानकारों ने कहा, अतिरिक्त शुल्क लागू करने की समयसीमा से पहले सतर्कता के कारण बाजार की धारणा काफी हद तक कमजोर रही, जिसका निर्यात-संवेदनशील क्षेत्रों पर भारी असर पड़ा। विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली, रुपये में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण दबाव और बढ़ गया, जिससे निवेशकों ने जोखिम कम करने का फैसला किया। अमेरिकी दंडात्मक शुल्क की समयसीमा कल खत्म होने के कारण घरेलू बाजार में सतर्कता का माहौल रहा। रुपये में लगातार गिरावट से दबाव और बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एफएमसीजी को छोड़कर सभी क्षेत्रों में व्यापक बिकवाली देखी गई, जिसमें खपत बढ़ने की उम्मीद से तेजी आई।
