अंबाला। सनातन धर्म कॉलेज, अंबाला छावनी के यूथ रेड क्रॉस यूनिट एवं जीव विज्ञान विभाग द्वारा रोटरी क्लब आॅफ अम्बाला के तत्वाधान में दिनांक 26 फरवरी 2026 को प्राणीशास्त्र प्रयोगशाला में कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला रोटरी क्लब अंबाला के अध्यक्ष डॉ. संजीव गोयल के कुशल निर्देशन में संपन्न हुई। ाहाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अलका शर्मा ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि सीपीआर का ज्ञान केवल एक कौशल नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम है। कार्यक्रम की संयोजिका एवं यूथ रेड क्रॉस काउंसलर सुश्री जीनत मदान ने कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. अनुभव शर्मा, एम.डी. क्रिटिकल केयर, डॉ जयदेव मेमोरियल रोटरी हॉस्पिटल अम्बाला, अंबाला का हार्दिक स्वागत करते हुए स्वागत भाषण एवं परिचयात्मक उद्बोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने सीपीआर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हृदयाघात, दुर्घटना या किसी भी आपात स्थिति में समय पर दिया गया सीपीआर किसी व्यक्ति का जीवन बचा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को इस जीवन रक्षक तकनीक को सीखकर समाज सेवा के लिए सदैव तत्पर रहने का संदेश दिया। कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. अनुभव शर्मा, एम.डी. क्रिटिकल केयर, डॉ जयदेव मेमोरियल रोटरी हॉस्पिटल अम्बाला, अंबाला ने अत्यंत सरल, वैज्ञानिक एवं प्रभावशाली ढंग से सीपीआर की संपूर्ण प्रक्रिया का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने हृदय गति रुकने की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, छाती पर सही स्थान पर दबाव (चेस्ट कंप्रेशन), कृत्रिम श्वसन (रेस्क्यू ब्रीदिंग) तथा आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाने की प्रक्रिया का सजीव प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि सही तकनीक एवं उचित समय पर दिया गया सीपीआर मस्तिष्क को निरंतर आॅक्सीजन की आपूर्ति बनाए रखता है, जिससे जीवन बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। डॉ. शर्मा ने केवल सैद्धांतिक जानकारी तक ही अपने सत्र को सीमित नहीं रखा, बल्कि डमी मॉडल पर स्वयं प्रदर्शन करके प्रत्येक चरण को विस्तार से समझाया। उनकी शिक्षण शैली की विशेषता यह रही कि उन्होंने विद्यार्थियों को सक्रिय रूप से शामिल किया। प्रत्येक विद्यार्थी को स्वयं अभ्यास करने का अवसर दिया गया और वे व्यक्तिगत रूप से उनकी तकनीक को सुधारते रहे। कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण ह्लहैंड्स-आॅन प्रशिक्षणह्व रहा, जिसमें लगभग 35 विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए डमी मॉडल पर स्वयं सीपीआर का अभ्यास किया। विद्यार्थियों में इस प्रशिक्षण को लेकर विशेष उत्साह और जिज्ञासा देखने को मिली। इस अवसर पर डॉ. सुमित छिब्बर सहायक प्रोफेसर वनस्पति विज्ञान एवं पूर्व यूथ रेड क्रॉस काउंसलर ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्राथमिक उपचार और जीवन रक्षक तकनीकों का ज्ञान होना चाहिए, क्योंकि आपातकालीन स्थिति किसी भी समय और किसी के साथ हो सकती है। उन्होंने इस प्रकार की कार्यशालाओं को समय की आवश्यकता बताया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।