रेवाड़ी। गढ़ी बोलनी रोड़ स्थित सोमाणी कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट, टेक्नोलॉजी एंड फार्मेसी परिसर में स्वतंत्रता सेनानी आरडी सोमाणी शिक्षा रत्न अवॉर्ड समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में 401 शिक्षकों एवं शिक्षा जगत के लोगों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि अशोक गर्ग पानीपत ने कहा कि शिक्षा और शिक्षक मनुष्य को नव जीवन प्रदान करते हैं, जिनके बिना जीवन निरर्थक हो जाता है। समारोह की शुरुआत हवन के साथ हुईं। इस भव्य आयोजन का उद्देश्य शिक्षकों के समाज के प्रति समर्पण, परिश्रम और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को सार्वजनिक रूप से सम्मान देना रहा। समारोह में हरियाणा के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षक, शिक्षाविद, प्राचार्य, मैनेजमेंट प्रतिनिधि और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सैंकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
संस्थान के सह संस्थापक विशाल सोमाणी एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षा किसी देश की संस्कृति और संस्कार को जन्म देती है। शिक्षक भविष्य के निर्माता होते हैं और उनके योगदान को सम्मान देना प्रत्येक समाज का नैतिक दायित्व है। समारोह की अध्यक्षता कर रहे एडवोकेट अमरनाथ गुप्ता ने कहा कि शिक्षा सबसे बड़ी सेवा है और सभी शिक्षक मान व सम्मान के योग्य है तथा यह कार्यक्रम सभी संस्थाओं के लिए प्रेरणा दायक है। विशिष्ट अतिथि ग्लोबल संत समाज कल्याण फाउंडेशन इंडिया यूके ऑस्ट्रेलिया के चेयरमैन स्वामी चंद्र देव ने कहा कि शिक्षा समाज की धुरी है जो कि मानव जीवन को गतिमान बनाने में अहम भूमिका निभाती है। समारोह में अधिकांश वक्ताओं ने प्राचीन शिक्षण पद्धति और नई शिक्षा नीति में अंतर तथा आज के दौर में शिक्षा क्षेत्र के सामने पेश चुनौतियों पर अपनी बात रखी।
समारोह में प्रोफेसर एचएल वर्मा, प्रो एसके गुप्ता, डा. शैलेंद्र पांडे, डा. मधुसूदन शर्मा, अमित शर्मा, गौरव मित्तल रोहतक, दीपक कुमार, दीपा भारद्वाज, गीता यादव, बाला देवी, प्रोफेसर यशपाल सिंह, योगाचार्य योगेंद्र, किसान नेता रमेश दलाल, अटेली से ठाकुर अतर लाल, पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह, ओमप्रकाश आर्य, लवली यादव, प्रो जेएस यादव, स्वामी सुखानंद, बासुदेव गर्ग चेयरमैन, फकीरचंद, एडवोकेट परिवर्तन सोमाणी आदि ने अपने विचार रखे। मंच संचालन हरिओम मित्तल भाली एवं राखी ने किया।
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि अशोक गर्ग पानीपत ने कहा कि शिक्षा और शिक्षक मनुष्य को नव जीवन प्रदान करते हैं, जिनके बिना जीवन निरर्थक हो जाता है। समारोह की शुरुआत हवन के साथ हुईं। इस भव्य आयोजन का उद्देश्य शिक्षकों के समाज के प्रति समर्पण, परिश्रम और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को सार्वजनिक रूप से सम्मान देना रहा। समारोह में हरियाणा के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षक, शिक्षाविद, प्राचार्य, मैनेजमेंट प्रतिनिधि और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सैंकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
संस्थान के सह संस्थापक विशाल सोमाणी एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षा किसी देश की संस्कृति और संस्कार को जन्म देती है। शिक्षक भविष्य के निर्माता होते हैं और उनके योगदान को सम्मान देना प्रत्येक समाज का नैतिक दायित्व है। समारोह की अध्यक्षता कर रहे एडवोकेट अमरनाथ गुप्ता ने कहा कि शिक्षा सबसे बड़ी सेवा है और सभी शिक्षक मान व सम्मान के योग्य है तथा यह कार्यक्रम सभी संस्थाओं के लिए प्रेरणा दायक है। विशिष्ट अतिथि ग्लोबल संत समाज कल्याण फाउंडेशन इंडिया यूके ऑस्ट्रेलिया के चेयरमैन स्वामी चंद्र देव ने कहा कि शिक्षा समाज की धुरी है जो कि मानव जीवन को गतिमान बनाने में अहम भूमिका निभाती है। समारोह में अधिकांश वक्ताओं ने प्राचीन शिक्षण पद्धति और नई शिक्षा नीति में अंतर तथा आज के दौर में शिक्षा क्षेत्र के सामने पेश चुनौतियों पर अपनी बात रखी।
समारोह में प्रोफेसर एचएल वर्मा, प्रो एसके गुप्ता, डा. शैलेंद्र पांडे, डा. मधुसूदन शर्मा, अमित शर्मा, गौरव मित्तल रोहतक, दीपक कुमार, दीपा भारद्वाज, गीता यादव, बाला देवी, प्रोफेसर यशपाल सिंह, योगाचार्य योगेंद्र, किसान नेता रमेश दलाल, अटेली से ठाकुर अतर लाल, पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह, ओमप्रकाश आर्य, लवली यादव, प्रो जेएस यादव, स्वामी सुखानंद, बासुदेव गर्ग चेयरमैन, फकीरचंद, एडवोकेट परिवर्तन सोमाणी आदि ने अपने विचार रखे। मंच संचालन हरिओम मित्तल भाली एवं राखी ने किया।
