अंबाला। राष्ट्रीय पंजाबी महासभा के नैशनल प्रेजिडैंट एवं हरियाणा के पूर्व सूचना आयुक्त अशोक मेहता ने कहा कि वर्ष 2010 में राष्ट्रीय पंजाबी महासभा की मांग पर ही तत्कालीन राज्य सरकार ने पंजाबी को हरियाणा में दूसरी भाषा का दर्जा दिया था, अब उनकी मांग है कि सरकार हरियाणा के स्कूलों में 10वीं कक्षा तक पंजाबी विषय को पढ़ाना अनिवार्य करे। इससे न केवल बेहद समृद्ध पंजाबी विरासत अगली पीढ़ी तक पहुंचेगी, बल्कि बच्चे हमारे महान गुरुओं की बाणी से भी रूबरू होंगे। इसके अलावा सरकार हरियाणा पंजाबी वैल्फेयर बोर्ड के गठन का भी मार्ग प्रशस्त करे, ताकि देश एवं धर्म के लिए महान कुबार्नी देने वाले पंजाबी समुदाय को अपनेरोजमर्रा के मुद्दों के लिए समुचित मंच मिल सके। अशोक मेहता शुक्रवार देर शाम अम्बाला शहर के घुंघट पैलेस में राष्ट्रीय पंजाबी महासभा की अम्बाला जिला इकाई द्वारा आयोजित लोहड़ी पारिवारिक मिलन समारोह को संबोधित कर रहे थे। महासभा के जिला अध्यक्ष सतीश चावला की अध्यक्षता में आयोजित इस शानदार कार्यक्रम की शुरूआत दिव्यांग छात्र को ट्राईसाइकिल भेंट करने के साथ हुई। इसके बाद अनेक वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि समाजसेवी इंजीनियर बलबीर सिंह थे, जबकि महासभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष हरभगवान छाबड़ा, प्रदेश महासचिव चौ. राकेश भल्ला उगाला, शाहबाद अध्यक्ष शुभम साहनी, जिला संरक्षक नरेश छाबड़ा, दिनेश ग्रोवर, नरेश खन्ना, महासचिव महेंद्र लक्की जुनेजा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीरू वढेरा, प्रेमरत्न गोसाईं, रमिंद्र डांग, उपाध्यक्ष हर्ष सेठी, राजकुमार नागपाल, रविंद्र पुनियानी, अश्वनी साहनी, रजत मलिक, मुख्य सलाहकार हरीश कपूर, सचिव हरिंद्र गुलाटी, विवेक हैप्पी चावला, मनमोहन मैनी, अशोक खन्ना, दीपक गुलाटी, विन्नी चावला, अमन अरोड़ा, कोषाध्यक्ष भूपेंद्र ओबराय, सह कोषाध्यक्ष अमित चानना, सहसचिव जीवन सहगल, विनोद बुद्धिराजा, आॅडिटर तिलक राज अरोड़ा, कानूनी सलाहकार माधव अरोड़ा, मीडिया प्रभारी राजीव भाटिया, पार्षद मिथुन वर्मा एवं मनीष आनंद, शिक्षाविद् डॉ. नवीन गुलाटी और व्यवसायी सुरजीत बुद्धिराजा विशेष तौर पर शामिल हुए।
अपने संबोधन में अशोक मेहता ने करीब चार माह की अल्प अवधि में सतीश चावला के नेतृत्व में महासभा की अम्बाला इकाई द्वारा किए गए समाजसेवा प्रकल्पों को मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि लोग अपने रिश्तेदारों के अंतिम संस्कार के लिए भी श्मशानघाट जाने से कतराते हैं, लेकिन महासभा के सदस्यों ने लावारिस शवों का ससम्मान संस्कार करने का बीड़ा उठाकर समाजसेवा का अनूठा उदाहरण पेश किया है। इसके अलावा स्व. श्रीमती स्वदेश चोपड़ा जी की पुण्य स्मृति में संचालित सिलाई केंद्र में 38 महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान करके स्वावलंबी बनाया जा रहा है। उन्होंने पंजाबी समुदाय की समृद्ध विरासत, देश एवं धर्म के लिए की गई कुर्बानियों और मेहनत की बदौलत हासिल की गई उपलब्धियों का विस्तारपूर्वक जिक्र करते हुए युवा पीढ़ी को इससे प्रेरणा लेने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि इंजीनियर बलबीर सिंह ने कहा कि वर्ष 1947 में जब देश का विभाजन हुआ, उस समय बहुत से हिन्दू-सिख परिवार देश एवं धर्म की रक्षा के लिए वर्तमान पाकिस्तान में अपना सब-कुछ छोडकर आए। इन पंजाबी परिवारों की हरियाणा एवं पंजाब को विकसित करने में बहुत बड़ी भूमिका रही। जरूरतमंदों की सहायता करने के मामले में भी पंजाबी पहली पंक्ति में खड़े होते हैं और राष्ट्रीय पंजाबी महासभा द्वारा यह काम विशेष तौर पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाबी संस्कृति में लोहड़ी जैसे त्यौहारों का विशेष महत्व है, क्योंकि लोहड़ी के बाद मौसम में बदलाव आता है, दिन बड़े होने शुरू हो जाते हैं और सूर्य की दिशा भी बदलती है।
राष्ट्रीय पंजाबी महासभा के दरवाजे हर जरूरतमंद के लिए खुले : सतीश चावला
राष्ट्रीय पंजाबी महासभा के जिला अध्यक्ष सतीश चावला ने कहा कि महासभा के दरवाजे हर जरूरतमंद के लिए खुले हैं। फिर चाहे किसी महिला को प्रशिक्षण देने का मामला हो, किसी गरीब लडकी के विवाह में सहायता का मामला हो, विद्यार्थी की पढ़ाई का मामला हो या किसी लावारिस अथवा जरूरतमंद शव के अंतिम संस्कार का मामला हो, राष्ट्रीय पंजाबी महासभा हर समय जरूरतमंदों के साथ है। सतीश चावला ने कहा कि पंजाबी समुदाय के लिए लोहड़ी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि निराशा और अंधेरे को मिटाने वाली आग है, इसलिए उन्होंने लोहड़ी पारिवारिक मिलन समारोह का आयोजन किया। उन्होंने कहा कि समाज की असली उन्नति बेटियों के आत्मनिर्भर बनने से शुरू होती है, लेकिन राष्ट्रीय पंजाबी महासभा ने इस दिशा में गंभीरता से काम किया। महासभा द्वारा अम्बाला शहर में स्थापित सिलाई केंद्र में 38 महिलाएं हुनर सीख रही हैं, आत्मनिर्भरता की ये 38 कहानियां इन परिवारों की उम्मीद एवं भविष्य को प्रदर्शित करती हैं। इसी प्रकार, यदि किसी गरीब परिवार को अपनी बेटी के विवाह में सहायता की जरूरत होगी तो महासभा द्वारा उनकी मदद की जाएगी, क्योंकि महासभा के लिए बेटी बोझ नहीं, बल्कि भविष्य है। सतीश चावला ने कहा कि महासभा का मानना है कि सेवा का असल अर्थ केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि समय पर दिया गया सहयोग है। इसी भावना को लेकर राष्ट्रीय पंजाबी महासभा ने सितम्बर 2025 में रक्तदान शिविर लगाया और अब 1 फरवरी को पंचायत भवन में फिर विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। इसी कड़ी में उन्होंने लावारिस एवं जरूरतमंद शवों का पूरे सम्मान के साथ विधिपूर्वक अंतिम संस्कार करवाने का बीड़ा उठाया है, जिसकी शुरूआत दो दिन पहले नसीरपुर से हो चुकी है। यह सेवा नहीं, बल्कि इंसानियत की अंतिम सलामी है। उन्होंने एक बार फिर अम्बाला शहर में पंजाबी भवन की स्थापना का संकल्प दोहराया और समाज से इसमें योगदान का आह्वान किया।
अपने संबोधन में अशोक मेहता ने करीब चार माह की अल्प अवधि में सतीश चावला के नेतृत्व में महासभा की अम्बाला इकाई द्वारा किए गए समाजसेवा प्रकल्पों को मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि लोग अपने रिश्तेदारों के अंतिम संस्कार के लिए भी श्मशानघाट जाने से कतराते हैं, लेकिन महासभा के सदस्यों ने लावारिस शवों का ससम्मान संस्कार करने का बीड़ा उठाकर समाजसेवा का अनूठा उदाहरण पेश किया है। इसके अलावा स्व. श्रीमती स्वदेश चोपड़ा जी की पुण्य स्मृति में संचालित सिलाई केंद्र में 38 महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान करके स्वावलंबी बनाया जा रहा है। उन्होंने पंजाबी समुदाय की समृद्ध विरासत, देश एवं धर्म के लिए की गई कुर्बानियों और मेहनत की बदौलत हासिल की गई उपलब्धियों का विस्तारपूर्वक जिक्र करते हुए युवा पीढ़ी को इससे प्रेरणा लेने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि इंजीनियर बलबीर सिंह ने कहा कि वर्ष 1947 में जब देश का विभाजन हुआ, उस समय बहुत से हिन्दू-सिख परिवार देश एवं धर्म की रक्षा के लिए वर्तमान पाकिस्तान में अपना सब-कुछ छोडकर आए। इन पंजाबी परिवारों की हरियाणा एवं पंजाब को विकसित करने में बहुत बड़ी भूमिका रही। जरूरतमंदों की सहायता करने के मामले में भी पंजाबी पहली पंक्ति में खड़े होते हैं और राष्ट्रीय पंजाबी महासभा द्वारा यह काम विशेष तौर पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाबी संस्कृति में लोहड़ी जैसे त्यौहारों का विशेष महत्व है, क्योंकि लोहड़ी के बाद मौसम में बदलाव आता है, दिन बड़े होने शुरू हो जाते हैं और सूर्य की दिशा भी बदलती है।
राष्ट्रीय पंजाबी महासभा के दरवाजे हर जरूरतमंद के लिए खुले : सतीश चावला
राष्ट्रीय पंजाबी महासभा के जिला अध्यक्ष सतीश चावला ने कहा कि महासभा के दरवाजे हर जरूरतमंद के लिए खुले हैं। फिर चाहे किसी महिला को प्रशिक्षण देने का मामला हो, किसी गरीब लडकी के विवाह में सहायता का मामला हो, विद्यार्थी की पढ़ाई का मामला हो या किसी लावारिस अथवा जरूरतमंद शव के अंतिम संस्कार का मामला हो, राष्ट्रीय पंजाबी महासभा हर समय जरूरतमंदों के साथ है। सतीश चावला ने कहा कि पंजाबी समुदाय के लिए लोहड़ी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि निराशा और अंधेरे को मिटाने वाली आग है, इसलिए उन्होंने लोहड़ी पारिवारिक मिलन समारोह का आयोजन किया। उन्होंने कहा कि समाज की असली उन्नति बेटियों के आत्मनिर्भर बनने से शुरू होती है, लेकिन राष्ट्रीय पंजाबी महासभा ने इस दिशा में गंभीरता से काम किया। महासभा द्वारा अम्बाला शहर में स्थापित सिलाई केंद्र में 38 महिलाएं हुनर सीख रही हैं, आत्मनिर्भरता की ये 38 कहानियां इन परिवारों की उम्मीद एवं भविष्य को प्रदर्शित करती हैं। इसी प्रकार, यदि किसी गरीब परिवार को अपनी बेटी के विवाह में सहायता की जरूरत होगी तो महासभा द्वारा उनकी मदद की जाएगी, क्योंकि महासभा के लिए बेटी बोझ नहीं, बल्कि भविष्य है। सतीश चावला ने कहा कि महासभा का मानना है कि सेवा का असल अर्थ केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि समय पर दिया गया सहयोग है। इसी भावना को लेकर राष्ट्रीय पंजाबी महासभा ने सितम्बर 2025 में रक्तदान शिविर लगाया और अब 1 फरवरी को पंचायत भवन में फिर विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। इसी कड़ी में उन्होंने लावारिस एवं जरूरतमंद शवों का पूरे सम्मान के साथ विधिपूर्वक अंतिम संस्कार करवाने का बीड़ा उठाया है, जिसकी शुरूआत दो दिन पहले नसीरपुर से हो चुकी है। यह सेवा नहीं, बल्कि इंसानियत की अंतिम सलामी है। उन्होंने एक बार फिर अम्बाला शहर में पंजाबी भवन की स्थापना का संकल्प दोहराया और समाज से इसमें योगदान का आह्वान किया।
