चंडीगढ़, 5 अगस्त 2025:
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस महानिदेशक (DGP) को आदेश दिया है कि वे उन पुलिस अधिकारियों की पूरी सूची अदालत में पेश करें जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हैं, लेकिन वे अभी भी सेवा में कार्यरत हैं। अदालत ने इस सूची को हलफनामे के रूप में पेश करने को कहा है, और अगली सुनवाई 25 अगस्त 2025 को निर्धारित की गई है।
क्या जानकारी मांगी गई है?
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि हर अधिकारी के बारे में निम्नलिखित विवरण शामिल होना चाहिए:
- अधिकारी का नाम, रैंक और वर्तमान पोस्टिंग
- FIR नंबर, दर्ज होने की तिथि और आरोप की धाराएं
- संबंधित पुलिस थाना
- वर्तमान जांच की स्थिति या कोर्ट में कार्यवाही की जानकारी
- यदि अधिकारी को निलंबित किया गया था और फिर बहाल किया गया हो, तो पुनर्नियुक्ति की तिथि
विवादित मामला बना वजह
यह आदेश विशेष रूप से इंस्पेक्टर विजय कुमार के मामले को लेकर आया है, जिन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत केस दर्ज है। वे पहले सेवा से हटाए गए थे, लेकिन बाद में उन्हें बर्नाला पुलिस लाइन में फिर से नियुक्त किया गया। अदालत ने इस पर गंभीर आपत्ति जताई।
लंबित FIRs की गंभीर स्थिति
पिछली सुनवाइयों में यह जानकारी सामने आई थी कि पंजाब में 3,888 एफआईआर ऐसे हैं, जिनकी जांच तीन साल से अधिक समय से लंबित है। राज्य सरकार ने स्वीकार किया था कि हजारों मामलों में अभी तक चार्जशीट या क्लोज़ रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब तक FIR लंबित हो, तब तक संबंधित पुलिस अधिकारियों को ड्यूटी पर रखना न्यायिक प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अदालत इस मामले को पारदर्शिता और जवाबदेही के दायरे में देख रही है।



