तत्पश्चात् प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता प्रारंभ की गई जिसमें लगभग 12 टीमों ने भाग लिया और सभी टीमों का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा। केपीएके महाविद्यालय की टीम प्रथम स्थान पर रही।सोहन लाल डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल व मुरलीधर डीएवी डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल द्वितीय स्थान पर और आर्य सीनियर सेकेंडरी स्कूल व मेजर आरएन कपूर डीएवी स्कूल तृतीय स्थान पर रहे। डीएवी पब्लिक स्कूल बराड़ा व डीएवी पब्लिक स्कूल,कैथल ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया। मुख्य अतिथि जे.एस.नैन ने विद्यार्थियों व श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज यदि बच्चों को संस्कारवान बनाना है तो इसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी अभिभावकों और अध्यापकों की है।
भारत की तो अतिथि देवो भव की प्रथा रही है।परंतु आज वह भारत कहीं खो गया है। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को पूरा समय दें।घर का वातावरण ऐसा बनाएं कि बच्चों में संस्कार स्वत: ही विकसित हो जाएं।अध्यापकों को भी बच्चों को संस्कारवान बनाने में पूरा सहयोग देना होगा क्योंकि बच्चे अपने अध्यापकों का अनुसरण सबसे ज्यादा करते हैं। प्रधानाचार्या रेखा गोयल भागी ने आए हुए अतिथियों का धन्यवाद किया। प्रतियोगिता के अंत में विजयी रही टीमों को पुरस्कृत किया गया। विभिन्न विद्यालयों से आए अध्यापकों व विद्यार्थियों के लिए खान-पान की भी उचित व्यवस्था की गई।
