चरखी दादरी, 9 फरवरी : (): उपायुक्त डा. मुनीश नागपाल ने कहा कि पानी जैसे प्राकृतिक संसाधन हमारे लिए उपहार नहीं हैं, बल्कि अगली पीढी तक पहुचाने के लिए हमारे उपर ऋण है। इन संसाधनों का अंधाधूंध प्रयोग खतरनाक हो सकता है। ऐसे में सभी को पानी को बचाने के लिए आगे आने की जरूरत है।
उपायुक्त डा. नागपाल सोमवार को अपने कार्यालय में जल शक्ति अभियान के तहत जल संचय जन भागीदारी से जन जागरूकता की ओर की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमें विसासत में पानी जैसे प्राकृतिक संसाधन मिलें हैं लेकिन ये हमारे लिए उपहार ना होकर ऋण की तरह हैं, जिसे हमे अगली पीढ़ी को लौटाना है। उन्होंने कहा कि पानी कें बिना जीवन की कल्पना तक नहीं की जा सकती है। फिर भी हर ओर पानी का अंधाधूंद दोहन किया जा रहा है। जोकि किसी भी हाल में सही नहीं है। ऐसे में सभी को मिलकर पानी को बचाने के लिए आगे आना होगा और प्रत्येक विकल्प पर काम करना होगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि जलशक्ति अभियान के अंतर्गत संबंधित विभागों द्वारा किया गया काम पोर्टल पर अपलोड किया जाए। अधिकतर विभागों द्वारा अभी तक जल शक्ति अभियान के अंर्तगत किए गए कार्यों की रिपोर्ट नहीं भेजी गई है। सभी विभागाध्यक्ष रिपोर्ट भी पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि वर्षा जल संग्रहण के लिए सरकारी स्कूलों के भवन पहरसरों में सोखते गड्ढे खुदवाकर उनकी फोटो पोर्टल पर अपलोड की जाए। इसी प्रकार पंचायत विभाग भी गांवों में सोखते गड्ढे खुदवाएं तथा ग्रामीणों को अपने घर के आगे भी वेस्ट पानी के लिए सोखता गड्ढा खोदने के लिए प्रेरित करें। आम लोगों को भी बारिश का पानी इक_े करने करने के लिए जागरूक किया जाए।
उपायुक्त ने कहा कि जिला के झोझू, दादरी, बौंद और बाढड़ा हर खंड के सरकारी भवनों व स्कूल भवनों में वर्षा जल संरक्षण के लिए वाटर टैंक व सोखते गड्ढे के निर्माण का कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाए। जिससे कि भूजलस्तर में सुधार हो सके। रेन वाटर हार्वेेस्टिंग सिस्टम बनाने के लिए सरकारी बिल्डिंग की छतों की सफाई करवा कर और पाइपलाईन बिछाकर पानी को वाटर स्टोरेज टैंक में इक_ïा किया जाए तथा ओवरफ्लो पानी को एक अलग सोखते गड्ढïे में डाला जाए, जिससे कि भूजल का लेवल सुधारा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि वाटर टैंक के पानी को बागवानी या सफाई के कार्य में बाद में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा जिला की पहाडियों में बारिश का पानी जमा करने के लिए विशेष तौर पर बांध बनाए जाएं। उन्होंने आम नागरिकों से भी जलसंरक्षण के लिए जलशक्ति अभियान में भागीदारी करने की अपील की है।
उपायुक्त डा. नागपाल सोमवार को अपने कार्यालय में जल शक्ति अभियान के तहत जल संचय जन भागीदारी से जन जागरूकता की ओर की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमें विसासत में पानी जैसे प्राकृतिक संसाधन मिलें हैं लेकिन ये हमारे लिए उपहार ना होकर ऋण की तरह हैं, जिसे हमे अगली पीढ़ी को लौटाना है। उन्होंने कहा कि पानी कें बिना जीवन की कल्पना तक नहीं की जा सकती है। फिर भी हर ओर पानी का अंधाधूंद दोहन किया जा रहा है। जोकि किसी भी हाल में सही नहीं है। ऐसे में सभी को मिलकर पानी को बचाने के लिए आगे आना होगा और प्रत्येक विकल्प पर काम करना होगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि जलशक्ति अभियान के अंतर्गत संबंधित विभागों द्वारा किया गया काम पोर्टल पर अपलोड किया जाए। अधिकतर विभागों द्वारा अभी तक जल शक्ति अभियान के अंर्तगत किए गए कार्यों की रिपोर्ट नहीं भेजी गई है। सभी विभागाध्यक्ष रिपोर्ट भी पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि वर्षा जल संग्रहण के लिए सरकारी स्कूलों के भवन पहरसरों में सोखते गड्ढे खुदवाकर उनकी फोटो पोर्टल पर अपलोड की जाए। इसी प्रकार पंचायत विभाग भी गांवों में सोखते गड्ढे खुदवाएं तथा ग्रामीणों को अपने घर के आगे भी वेस्ट पानी के लिए सोखता गड्ढा खोदने के लिए प्रेरित करें। आम लोगों को भी बारिश का पानी इक_े करने करने के लिए जागरूक किया जाए।
उपायुक्त ने कहा कि जिला के झोझू, दादरी, बौंद और बाढड़ा हर खंड के सरकारी भवनों व स्कूल भवनों में वर्षा जल संरक्षण के लिए वाटर टैंक व सोखते गड्ढे के निर्माण का कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाए। जिससे कि भूजलस्तर में सुधार हो सके। रेन वाटर हार्वेेस्टिंग सिस्टम बनाने के लिए सरकारी बिल्डिंग की छतों की सफाई करवा कर और पाइपलाईन बिछाकर पानी को वाटर स्टोरेज टैंक में इक_ïा किया जाए तथा ओवरफ्लो पानी को एक अलग सोखते गड्ढïे में डाला जाए, जिससे कि भूजल का लेवल सुधारा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि वाटर टैंक के पानी को बागवानी या सफाई के कार्य में बाद में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा जिला की पहाडियों में बारिश का पानी जमा करने के लिए विशेष तौर पर बांध बनाए जाएं। उन्होंने आम नागरिकों से भी जलसंरक्षण के लिए जलशक्ति अभियान में भागीदारी करने की अपील की है।



