केंद्र सरकार ने ग्रामीण भारत की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने और पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने मिज़ोरम, ओडिशा और त्रिपुरा के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर वित्त वर्ष 2025-26 की पहली किस्त के रूप में 284 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान जारी किया है।
सबसे बड़ा हिस्सा ओडिशा को 240.81 करोड़ रुपये के रूप में मिला है, जो 6,085 ग्राम पंचायतों और 63 ब्लॉक पंचायतों के बीच वितरित होगा। मिज़ोरम की 827 ग्राम परिषदों को 14.27 करोड़ रुपये और त्रिपुरा को 29.75 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो 606 ग्राम पंचायतों, 35 ब्लॉक पंचायतों, आठ जिला परिषदों तथा राज्य की ग्राम समितियों और ब्लॉक सलाहकार समितियों में खर्च किए जाएंगे। यह वित्तीय सहायता “अनटाइड ग्रांट” के रूप में है, जिसका उपयोग स्थानीय प्रशासन अपनी प्राथमिकताओं के अनुरूप कर सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य गांवों में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत करना, खुले में शौच से मुक्ति (ओडीएफ) कायम रखना, घरेलू कचरे का प्रबंधन एवं जल संरक्षण सुनिश्चित करना है।
गौरतलब है कि मार्च 2025 में भी केंद्र ने कर्नाटक और त्रिपुरा के ग्रामीण निकायों के लिए 436 करोड़ रुपये जारी किए थे। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हाल ही में प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के लिए पांच वर्षों में 6,520 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन अनुदानों से ग्रामीण शासन में पारदर्शिता और मजबूती आएगी तथा गांवों में जीवन स्तर सुधारने की दिशा में ठोस प्रगति होगी।



