हाल ही में आई बाढ़ जैसी स्थिति ने अंबाला शहर को बुरी तरह प्रभावित किया। इस मुश्किल घड़ी में जहां कई लोग अपने-अपने घरों में सुरक्षित थे, वहीं कुछ ऐसे भी थे ,जो बुरी तरह फंस गए थे और मदद की बाट जोह रहे थे।ऐसा ही एक मामला सामने आया है ,एक मूक-बधिर मोची का, जो वर्षों से जिला बार अंबाला की जिला अदालत में मेहनत से जूते पॉलिश कर अपना गुजारा करता है। यह मेहनती इंसान बरसात ज्यादा होने की वजह से कई दिन से जूते पोलिश नहीं कर सका और यह बेचारा न सुन सकता है, न बोल सकता है ऐसे में किसी से मदद माँगना भी उसके लिए असंभव था।इस कठिन समय में एडवोकेट हर्ष साहनी ने मानवता की अनूठी मिसाल पेश की। उन्होंने न केवल उस मोची की मदद की, बल्कि उसके लिए आवश्यक समान, भोजन, व्यवस्था भी की , लेकिन जब इस घटना के बारे में अंबाला के लोगों को पता चला, तो हर किसी ने हर्ष साहनी की सराहना की।समाजसेवी और एडवोकेट हर्ष साहनी ने इस विषय पर मीडिया से कहा, “मेरा अखबारों में आना या मीडिया में दिखना मेरी पहचान नहीं है। मेरी सोच यह है कि अगर मेरी तस्वीर और मेरे काम को देखकर समाज में अच्छी सोच पैदा हो, तो लोग आगे आएंगे और जरूरतमंदों की मदद करेंगे सिर्फ यही मेरा उद्देश्य है।”हर्ष साहनी की इस सोच ने न सिर्फ उस मूक-बधिर मोची को नई उम्मीद दी, बल्कि समाज को यह सिखाया कि असली पहचान नाम या शोहरत में नहीं, बल्कि सेवा और संवेदना में होती है।अंबाला के मीडिया ने भी सराहना करते हुए कहा कि अंबाला जैसे शहर में हर्ष साहनी जैसे समाजसेवी अगर आगे आते रहें, तो कोई भी बाढ़, विपत्ति या मुश्किल स्थिति में किसी जरूरतमंद का हौसला नहीं तोड़ पाएगी , अंबाला की जनता की माने तो हर्ष साहनी अंबाला की जनता की दिलों की धड़कन बन चुके हैं।
बाढ़ में फंसे एक मूक-बधिर मोची की मदद कर मिसाल बने हर्ष साहनी
