डी.ए.वी. कॉलेज (लाहौर), अंबाला शहर की महात्मा हंसराज लाइब्रेरी के तत्वाधान में शनिवार को “शिक्षा और शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का अनुप्रयोग : अवसर और चुनौतियाँ” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय बहुविषयक संगोष्ठी का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी उच्चतर शिक्षा निदेशालय हरियाणा द्वारा अनुमोदित थी। कार्यक्रम के प्रथम सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और डी.ए.वी. गान के साथ हुआ। प्राचार्य प्रो. राजीव महाजन, संगोष्ठी के संयोजक डॉ. सुभाष शर्मा, सह-संयोजक डॉ. नरेंद्र कुमार तथा आयोजन सचिव डॉ. सुखदेव सिंह ने मुख्य वक्ता प्रो. मनोज कुमार जोशी और मुख्य अतिथि प्रो. संजीव शर्मा (अध्यक्ष, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय) का पौधारोपण एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया। अपने स्वागत भाषण में प्राचार्य प्रो. महाजन ने महाविद्यालय प्रांगण में पहुंचे सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज शिक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही है। कार्यक्रम का संचालन प्रो. प्रियंका मलिक ने गरिमामयी ढंग से किया। मुख्य वक्ता प्रो. जोशी ने शिक्षा और शोध में एआई की बढ़ती प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए इसके व्यावहारिक उपयोगों की चर्चा की। मुख्य अतिथि प्रो. संजीव शर्मा ने एआई की नैतिक और सामाजिक चुनौतियों को रेखांकित करते हुए इसके समुचित उपयोग पर बल दिया। पहले तकनीकी सत्र में कम्प्यूटर साइंस विभाग के प्रो. चन्द्रकांत ने बायोमेट्रिक सुरक्षा विषय पर वक्तव्य दिया। एनआईटी कुरुक्षेत्र कम्प्यूटर एप्लीकेशन विभाग के डॉ अंशु पराशर ने एआई के उच्च शिक्षा में उपयोग पर वक्तव्य दिया। प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डाॅ बालेश कुमार, लाइब्रेरियन एसडी कॉलेज अंबाला और डॉ अनुप्रीत एस टीवाना, प्रोफेसर भूगोल विभाग माता गुजरी कॉलेज, फतेहगढ़ साहिब ने की। दूसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ रुपेश गौर और डॉ अंजु नागपाल ने की। तीसरी तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ अश्विनी शर्मा, डीएवी कॉलेज पेहवा और डॉ राजेंद्र कुमार, डीएवी कॉलेज सढौरा ने की। डॉ अजय कुमार अरोड़ा ने प्रौद्योगिकी का पुस्तकालय में प्रयोग विषय पर वक्तव्य दिया। संगोष्ठी के तीन तकनीकी सत्रों में 52 शोधकर्ताओं ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए और एआई की संभावनाओं व चुनौतियों पर विचार रखे। समापन सत्र की अध्यक्षता कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पंजाबी विभागाध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह ने की। संगोष्ठी को सफल बनाने में डॉ. चांद सिंह, डॉ. जसमेर सिंह, डॉ. अत्तिमुक्त, डॉ. गरिमा सुमरान, डॉ. विनय गोयल, डॉ. मधु गोयल और प्रो. मीना मलिक का विशेष योगदान रहा। अंत में संयोजक डॉ. सुभाष शर्मा ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी का समापन राष्ट्रीय गान के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। प्रासंगिक विषय और सार्थक विमर्श के कारण इस संगोष्ठी को व्यापक सराहना प्राप्त हुई।