मार्दव धर्म आत्मा का वास्तविक स्वरूप है। जहाँ नम्रता नहीं, वहाँ धर्म भी नहीं। नियम, व्रत, तप, दान और पूजा सभी विनय भाव के बिना निष्फल हैं। अहंकार करने वाला अपनी आत्मा को और दूसरों को ठगता है।
इन्हीं विचारों के साथ दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। मीडिया प्रभारी राजीव जैन ने बताया कि सिविल रोड स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर, सराय मोहल्ला में प्रातः विशेष अभिषेक एवं पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ।
श्रीजी का अभिषेक अनिल जैन व सतीश जैन (बैंक वाले) के परिवार द्वारा शांतिधारा के साथ संपन्न हुआ, तत्पश्चात सभी भक्तों ने सामूहिक अभिषेक किया। बाहर से आए कलाकारों ने भक्ति गीतों से ऐसा वातावरण बनाया कि मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर नृत्य करने लगे। दृश्य ऐसा प्रतीत हुआ मानो देवगण स्वयं पधार गए हों।
प्रातःकाल पूजा विनय पाठ, पचमेरू पूजन, सोलह कारण पूजा, दशलक्षण पूजन विधान, भगवान महावीर स्वामी पूजन सम्पन्न हुआ तथा अष्टद्रव्य से बना महाअर्घ्य भगवान के चरणों में अर्पित किया गया। कार्यक्रम का समापन श्रीजी की महा आरती से हुआ।
इस अवसर पर राजीव जैन, मंदिर प्रधान अतुल जैन, अजय जैन, प्रदीप जैन, विकास दलाल, शलेष जैन, सुनील जैन, गौतम जैन, संजय जैन, चक्रेश जैन, राजीव जैन नानक, अनिल लोहिया, संदीया जैन, अनुज जैन, अजीत जैन, पुनीत जैन, रिषक जैन, मनोज जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।