सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) तथा शिक्षा मंत्रालय द्वारा 24 नवंबर 2020 को जारी राष्ट्रीय स्कूल बैग नीति 2020 का पालन चंडीगढ़ के स्कूलों में नहीं हो रहा है। नीति के तहत कक्षा 1 से 10 तक के बच्चों के बैग का वजन उनके शरीर के वजन का 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। साथ ही प्री-प्राइमरी बच्चों के लिए बैग पूरी तरह निषिद्ध हैं और कक्षा 1 व 2 के छात्रों के लिए होमवर्क नहीं देना है। कक्षा 3 से 5 के लिए प्रति सप्ताह अधिकतम दो घंटे का होमवर्क निर्धारित किया गया है। शिक्षकों को अगले दिन लाने वाली किताबों और कॉपियों की जानकारी पहले से देनी चाहिए ताकि बच्चों पर अनावश्यक बोझ न पड़े। लेकिन चंडीगढ़ के स्कूलों में इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है। बच्चों के बैग का वजन उनके शरीर के वजन का 15 से 20 प्रतिशत या उससे अधिक पाया जा रहा है। उदाहरण के लिए, 12 वर्षीय छात्र (वजन 42 किलोग्राम) को 6.2 किलोग्राम का बैग लेकर स्कूल जाना पड़ता है, जबकि नीति के अनुसार यह अधिकतम 4.2 किलोग्राम होना चाहिए। इसी तरह 7 वर्षीय छात्र (वजन 23 किलोग्राम) 4.5 किलोग्राम का बैग ढो रहा है, जबकि अधिकतम 2.3 किलोग्राम की अनुमति है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक भारी बैग ढोने से बच्चों की रीढ़ की हड्डी, कंधों और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यही नहीं, चंडीगढ़ के अधिकांश स्कूलों में सुरक्षित पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण बच्चे अपने साथ पानी की बोतल भी लेकर जाते हैं, जिससे उनका भार और बढ़ जाता है। राष्ट्रीय स्कूल बैग नीति में बच्चों की सुविधा के लिए बुक बैंक, लॉकर व्यवस्था, और होमवर्क कम करने जैसे कई प्रावधान भी शामिल हैं। लेकिन चंडीगढ़ के स्कूलों में इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया है।
इस मुद्दे पर सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन ने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष आर.के. गर्ग ने कहा, हम चाहते हैं कि चंडीगढ़ प्रशासन इस नीति को प्रभावी रूप से लागू करे ताकि बच्चों को अनावश्यक भार से राहत मिल सके। बच्चों का स्वास्थ्य सर्वोपरि होना चाहिए।
एसोसिएशन ने शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी कार्यालय आदेश (संख्या F.No. 1-4/2018-IS-3) का हवाला देते हुए सभी स्कूलों में नीति लागू करने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारी बैग ढोने से बच्चों में पीठ दर्द, कंधों में अकड़न जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसलिए बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को तत्काल कदम उठाने चाहिए। यह मुद्दा केवल नियमों का नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य और उनके शारीरिक व मानसिक विकास से जुड़ा है। चंडीगढ़ प्रशासन यदि समय रहते नीति लागू कर देता है तो यह न केवल बच्चों की मदद करेगा बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण बनेगा।
