समालखा के बसाड़ा गांव में ग्रामीण महिलाओं द्वारा भिवानी की शिक्षिका मनीषा की मौत की निष्पक्ष और त्वरित जांच किए जाने व परिजनों को न्याय दिए जाने की मांगों के साथ कैंडल मार्च के जरिए रोष मार्च निकाला गया। महिलाओ द्वारा दो मिनिट का मौन रखकर मनीषा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सभा को संबोधित करते हुए एडवोकेट पूनम ने कहा कि आज बेटियां कहीं भी सुरक्षित नहीं रही हैं। आए दिन प्रदेश और देश में ऐसे हादसे हो रहे हैं। लेकिन सरकार और पुलिस प्रशासन महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने और अपराधियों में खौफ व्याप्त करने में नाकाम रहा है, यही कारण है कि अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। एक तरफ लड़कियां पढ़ लिखकर पढ़ाई, नौकरी, खेलों व अंतरिक्ष में झंडे गाड़ रही हैं; वहीं दूसरी तरफ वे प्रदेश में अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। मनीषा के मामले में भी प्रशासन द्वारा तत्परता नहीं दिखाई गई और सीबीआई को केस सौंपने में अनावश्यक देरी की गई।
एडवोकेट संजय कुमार ने कहा कि हम एक तरफ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देकर लिंगानुपात को सुधारने के लिए कोशिश कर रहे हैं जबकि इस तरह की एक दो वारदात ही इस लक्ष्य पर प्रश्नचिन्ह उठा देती है।
गांव बसाड़ा में कुमारी दीपिका ने महिलाओं का नेतृत्व किया ओर रोष मार्च निकाला। उन्होने सरकार से मांग की इस मामले में जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए।
समालखा के बसाडा गांव मे मनीषा को न्याय दिलाने के लिए कैंडल मार्च के साथ किया रोष प्रदर्शन
