पशुधन प्रदर्शनी में शामिल बादशाह घोड़े ने पहली बार इसी प्रतियोगिता में भाग लिया था। सिर से लेकर पांव तक पूरी तरह से सफ़ेद ये घोड़ा मेले में आकर्षण का मुख्य केंद्र बना रहा। बादशाह की उम्र 28 महीने है, जबकि ऊंचाई 65 इंच है। इसकी ऊंचाई, सुंदरता, व्यवहार, खाने-पीने व नस्ल के आधार पर बादशाह की कीमत लग्जरी कार से भी अधिक है। घोड़े के मालिक संत लाल ने बताया कि इसकी कीमत 50 लाख रुपए लग चुकी है, जबकि उन्होंने बेचने से मना कर दिया है, इसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। बादशाह को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है।
बादशाह की खुराक पर दिया जाता है विशेष ध्यान
बादशाह घोड़े के मालिक संत लाल का कहना है कि बादशाह बेहद उम्दा नस्ल का घोड़ा है। जिसने राज्य स्तर की प्रदर्शनी में द्वितीय इनाम जीत कर अपनी सर्वश्रेष्ठता साबित की है, ये उनके जिला के लिए गौरव की बात है। संत लाल ने बताया कि उन्हें बचपन से ही घोड़ों का शौक है। वर्तमान में उनके पास 8 और घोड़े हैं। उन्होंने बताया कि बादशाह की सेवा के लिए उन्होंने कोई व्यक्ति नहीं रखा है, जबकि वो स्वयं इसकी देखरेख व हर जरूरत पूरी करते है। बादशाह घोड़े की खातिरदारी में वो हजारों रूपए खर्च वहन करते हैं। उसे मौसम के मुताबिक खुराक दी जाती है। इसके साथ ही सप्ताह में 4 बार उसकी तेल से मालिश की जाती है। बादशाह को दिन में तीन बार अलग-अलग खुराक दी जाती हैं। सुबह 2 से 3 किलो उबले काले चने दिए जाते हैं। उसके बाद इसे घुमाने के लिए फार्म पर लेकर जाते हैं, जहां वो घास चरता है। शाम को उसे गाय का दूध पिलाया जाता है। सर्दी में उसे दूध में बादाम उबालकर देते हैं और बाजरा भी दिया जाता है। घोड़े के मालिक संत लाल ने बताया कि गर्मी के दिनों में उसे मक्खन भी खिलाया जाता है। इसके अलावा जौ, गाजर, गाजर का जूस और देसी गाय के घी की चूरी देते हैं। उन्होंने बताया कि इसे हर रोज नहलाया जाता है।
घोड़ों के बारे में गुजरात से ली विशेष ट्रेनिंग
संत लाल ने बताया कि घोड़ों का शौक उनके खून में है। करीब 40 वर्ष पहले उनके दादा के पास एक घोड़ी थी। दादा के बाद उन्होंने घोड़े रखना शुरू कर दिया। संत लाल को घोड़ों का इतना शौक है कि घोड़ों के बारे में पुख्ता जानकारी के लिए उन्होंने गुजरात से स्पेशल और प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेकर घोड़े रखना शुरू किया था।



