-छोटे उद्योगों के सामने समस्या सबसे ज्यादा, ऑर्डर रद्द होने से खड़ा हुआ संकट
अमेरिका द्वारा भारत से आने वाले सामान पर 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाने का ऐलान कई उद्योगों के लिए बड़ा संकट खड़ा करने वाला है। खासकर यह आयात शुल्क छोटे और मझोले उद्योगों का कारोबार प्रभावित करेगा, उनमें काम करने वाले लाखों लोगों के रोजगार पर भी संकट खड़ा कर सकता है। इसमें सबसे ज्यादा दिक्कतें वस्त्र, ज्वेलरी, कालीन, फॉर्मा और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे उत्पाद तैयार करने वाले उद्यमों को होगा। भारत के कई विनिर्माण क्षेत्र अमेरिकी बाजार से मिलने ऑर्डर पर निर्भर हैं। इन क्षेत्रों से जुड़े सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) बड़े सप्लायर के लिए उत्पाद तैयार करते हैं, जो अमेरिका बाजार में उनके उत्पादों को ले जाकर बेचते है।
अब सप्लायर (आपूर्तिकर्ताओं) ने काफी समय से नए ऑर्डर देने बंद कर दिए या उनमें बड़ी कम कर दी थी लेकिन अब अमेरिकी द्वारा अतिरिक्त शुल्क के साथ कुल 50 फीसदी शुल्क लगने से अमेरिकी से मिलने वाले ऑर्डर में भारी कमी आएगी। ऐसी स्थिति में कंपनियों को उत्पादान घटाना पड़ सकता है। इसका परिणाम छोटे उद्योग व कंपनियां कर्मचारियों की छंटनी, नई भर्तियों पर रोक और कर्मचारियों की आय में कटौती जैसे कदम उठा सकती हैं। इससे जाहिर है कि देश में लाखों लोगों के रोजगार को खतरा पैदा हो सकता है। खासकर श्रमिक वर्ग से आने वाले लोगों का रोजगार सबसे ज्यादा संकट में दिखाई देता है।
अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा सकता है असर
अनुमान है कि अमेरिकी आयात शुल्क के चलते देश के अंदर कारोबारी से जुड़ी प्रक्रिया धीमी होगी। कई क्षेत्रों की आय में तेजी से गिरावट आ सकती है, जिसमें फॉर्मा, इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल और ज्वेलरी जैसे उद्योग सीधे तौर पर प्रभावित होगा, जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी बड़ सकता है। अनुमान है कि अर्थव्यवस्था में 0.4 से 0.5 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। यानी देश की चालू वित्तीय वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद 6.5 के अनुमान से घटकर 6.0 प्रतिशत पर आ सकती है।
अमेरिका पर भी पड़ेगा बड़ा असर
जानकार मानते हैं कि भारत के मुकाबले अमेरिकी को अधिक नुकसान होगा। भारत अमेरिका को जेनेरिक दवाओं और मेडिकल उपकरण की बड़ी मात्रा में आपूर्ति करता है जो अमेरिका बाजार में सस्ते दामों पर उपलब्ध होते हैं। इसके साथ ही, भारत से कपड़े और इंजीनियरिंग गुड्स भी सस्ती दरों पर सप्लाई किए जाते हैं जो टैरिफ लगने के बाद महंगे होंगे। अमेरिकी द्वारा बाकी देशों पर आयात शुल्क बढ़ाया गया है। इससे अमेरिका में बाकी देशों से आने वाली सामान भी महंगा होगा।
