परशुराम नगर, चांदनी चौक में श्राद्ध पक्ष के अवसर पर Bhagwat Katha का आयोजन किया जा रहा है। कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से कथा का श्रवण किया। कथा व्यास आचार्य सनातन चैतन्य जी महाराज ने विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया।

कथा के दौरान भगवान शिव और माता सती के प्रसंग ने श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस दौरान धार्मिक वातावरण में श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए।

राजा परीक्षित की कथा से मिला संदेश

आचार्य सनातन चैतन्य जी महाराज ने राजा परीक्षित के जीवन प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि श्रृंगी ऋषि के श्राप के बाद राजा परीक्षित को सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से मृत्यु होने की जानकारी मिली।

इसके बाद राजा परीक्षित ने सांसारिक मोह त्याग दिया। उन्होंने भगवान की शरण ग्रहण कर शुकदेव मुनि से भागवत कथा का श्रवण किया।

आचार्य जी ने कथा के माध्यम से समर्पण, सावधानी और आध्यात्मिक ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला।

मनु-शतरूपा और कपिल भगवान का प्रसंग

कथा को आगे बढ़ाते हुए आचार्य जी ने मनु और शतरूपा के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने उनकी संतानों और जीवन से जुड़े धार्मिक प्रसंगों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि देवहूति और कर्दम प्रजापति के यहां भगवान कपिल का अवतार हुआ था। कपिल भगवान ने माता देवहूति को प्रकृति, पुरुष और तत्वज्ञान का दिव्य ज्ञान दिया।

शिव-सती प्रसंग पर निकली सुंदर झांकी

Bhagwat Katha के दौरान भगवान शिव और माता सती से जुड़ा प्रसंग सुनाया गया। इस अवसर पर भगवान शंकर और माता पार्वती की सुंदर झांकी निकाली गई।

झांकी के दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की। भक्तों ने हर-हर महादेव के जयकारे लगाए। भजनों के बीच श्रद्धालु झूमते और नृत्य करते नजर आए।

आरती के बाद प्रसाद वितरण

कथा के समापन पर भगवान की आरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम के उपरांत संत पधरावनी और भोज-प्रसादी का आयोजन भी किया गया।