अपनी विभिन्न मांगों को लेकर Scheme Workers ने रविवार को अंबाला में जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों ASHA Workers और Mid-Day Meal Workers सिटी पार्क में एकत्रित हुईं। इसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी अंबाला लोकसभा सांसद वरुण चौधरी के निवास पर पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शन का नेतृत्व आशा वर्कर्स यूनियन की जिला सचिव कविता शर्मा और मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन की जिला प्रधान ललिता खन्ना ने किया। यूनियन नेताओं ने कहा कि Scheme Workers लंबे समय से सरकारी योजनाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जा रहा है।

दो महीने में मांगें पूरी करने का अल्टीमेटम

यूनियन नेताओं ने सरकार को मांगें पूरी करने के लिए दो महीने का समय दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि 1 से 3 दिसंबर तक प्रदेशभर की परियोजना वर्कर्स तीन दिवसीय हड़ताल करेंगी। इसके अलावा 1 दिसंबर को दिल्ली में प्रदर्शन के लिए कूच किया जाएगा।

42 हजार रुपये मासिक वेतन की मांग

वर्कर्स ने 45वें श्रम सम्मेलन के निर्णय के अनुसार आशा, मिड-डे मील, आंगनवाड़ी और क्रेच वर्कर्स को स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की।

इसके अलावा सभी Scheme Workers के लिए कम से कम 42 हजार रुपये मासिक वेतन की मांग की गई। वर्कर्स ने 12 महीने का वेतन, ग्रेच्युटी, सेवानिवृत्ति लाभ और 21 हजार रुपये मासिक पेंशन की मांग भी रखी।

ASHA Workers की भी कई मांगें

ज्ञापन में ASHA Workers को केंद्र सरकार द्वारा घोषित 1500 रुपये का भुगतान करने की मांग शामिल रही। वर्कर्स ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में ऑनलाइन काम के बढ़ते बोझ को कम करने की मांग की।

उन्होंने एफआरएस पर रोक लगाने की मांग भी उठाई। इसके अलावा छह वर्ष तक के बच्चों का अनिवार्य रूप से आंगनवाड़ी में पंजीकरण कराने की मांग की गई।

Mid-Day Meal Workers की छंटनी रोकने की मांग

Mid-Day Meal Workers ने छंटनी रोकने की मांग की। उन्होंने हटाई गई वर्कर्स को दोबारा काम पर लेने की मांग भी रखी।

यूनियन नेताओं ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को रद्द करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि शिक्षा और पोषण से जुड़ी योजनाओं में काम करने वाली महिलाओं को उचित अधिकार मिलने चाहिए।

सरकारी योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका

यूनियन नेताओं बलजिंद्र कौर, सोनिया और सीटू जिला कमेटी सदस्य मास्टर कुलदीप चौहान ने प्रदर्शन को संबोधित किया।

उन्होंने दावा किया कि देशभर में एक करोड़ से अधिक वर्कर्स विभिन्न सरकारी परियोजनाओं में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बाल विकास योजना, मिड-डे मील और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन महत्वपूर्ण योजनाएं हैं।

इन योजनाओं का सीधा संबंध बच्चों, महिलाओं के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य से है। इसके बावजूद इनमें काम करने वाली महिलाओं को कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जा रहा है।

दिल्ली कूच की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार को उनकी मांगों पर जल्द फैसला लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर Ambala Protest के बाद आंदोलन को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तेज किया जाएगा।

प्रदर्शन में ममतेश चौहान, बॉबी, कविता, रणजीत कौर, संगीता, सतविंद्र और रेनू बाला ने भी विचार रखे। सीटू की ओर से सतीश सेठी, रमेश नन्हेड़ा, सतपाल चौहान और बलवंत सिंह ने भी प्रदर्शन को संबोधित किया।