अंबाला। भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) का अभिन्न अंग के रूप में गीता-प्रेरित नीडोनॉमिक्स, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत समग्र शिक्षा प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है, यह विचार नीडोनॉमिक्स विचारधारा के प्रवर्तक, पूर्व कुलपति एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ मदन मोहन गोयल ने सूर्या कॉलेज आॅफ एजुकेशन, भनौखेड़ी (अम्बाला) द्वारा आयोजित एक आॅनलाइन अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। महाविद्यालय की अध्यक्ष डॉ. करमजीत कौर ने स्वागत भाषण दिया तथा प्रो. एम. एम. गोयल के विशिष्ट शैक्षणिक योगदान और उच्च शिक्षा में नेतृत्व के लिए उन्हें सम्मान-पत्र भेंट किया। सम्मेलन के संयोजक गुरतेज सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जबकि डॉ. विनीत कुमार मिश्रा, प्राचार्य ने मंच संचालन का दायित्व निभाया। निमंत्रण हेतु आभार व्यक्त करते हुए प्रो. गोयल ने कहा कि डॉ. करमजीत कौर जीवन-मुक्ति की सजीव प्रतीक हैं—जो अनु-गीता के अनुसार अपने कर्मों से पद्म श्री सम्मानित व्यक्तियों से भी श्रेष्ठ हैं। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत समग्र शिक्षा हेतु भारतीय ज्ञान प्रणाली विषय पर बोलते हुए प्रो. गोयल ने कहा कि आधुनिक शिक्षा को मूल्य-आधारित, नैतिक तथा मानव-केंद्रित स्वरूप में विकसित होना चाहिए। नई शिक्षा नीति की 360-डिग्री समग्र शिक्षा की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारतीय ज्ञान प्रणाली के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, सामाजिक-सांस्कृतिक समरसता तथा संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया, जो उत्तरदायित्व , जवाबदेही और नैतिकता अर्थात राम के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित हो। प्रो. गोयल ने हितोपदेश की शाश्वत शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए जीवन की एक स्वाभाविक प्रक्रिया को रेखांकित किया—ज्ञान से विनम्रता आती है, विनम्रता से योग्यता विकसित होती है, योग्यता से धन प्राप्त होता है, धन से धर्म का पालन होता है और अंतत: धर्म से सुख की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि नीडोनॉमिक्स इसी क्रम को पुनर्स्थापित करने का प्रयास करता है तथा शिक्षा के उद्देश्य को केवल आजीविका तक सीमित न रखकर, उसे सार्थक और संतोषपूर्ण जीवन की दिशा में अग्रसर करता है। प्रो. गोयल ने नीडोनॉमिक्स को अर्थशास्त्र का एक व्यवहारिक और सामान्य-बुद्धि पर आधारित दृष्टिकोण बताया, जो अत्यधिक इच्छाओं के स्थान पर वास्तविक मानवीय आवश्यकताओं को प्राथमिकता देता है, ताकि नीडो-वेल्थ, नीडो-हेल्थ और नीडो-हैप्पीनेस की प्राप्ति हो सके। अपने संबोधन के अंत में प्रो. गोयल ने शिक्षकों और विद्यार्थियों से स्ट्रीट स्मार्ट बनने का आह्वान किया अर्थात सरल , नैतिक , क्रियाशील , उत्तरदायी और पारदर्शी ताकि शिक्षा को व्यक्तिगत कल्याण और सामाजिक समरसता के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप बनाया जा सके।