जींद। फाल्गुन अमावस्या और साल का पहला सूर्य ग्रहण मंगलवार को है। अमावस्या को लेकर तिथि 16 फरवरी सोमवार शाम 5:34 बजे शुरू होकर 17 फरवरी शाम 5:30 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार अमावस्या मंगलवार को मनाई जाएगी। श्रद्धालु पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर मंगलवार को अमावस्या पर सरोवर में स्नान, पिंडदान करके करके तर्पण करेंगे। पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किदवंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। वर्ष 2026 का पहला सूर्य ग्रहण आज वर्ष 2026 का पहला सूर्य ग्रहण भी मंगलवार को लगेगा। यह कंकण सूर्यग्रहण होगा और यह अमावस्या तिथि को लगेगा। जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि सूर्य ग्रहण तब लगता है जब सूर्य और पृथ्वी के बीच से चंद्रमा आ जाता है। उस समय चंद्रमा की छाया पडऩे से सूर्यग्रहण लगता है। भारत में यह ग्रहण दिखाई नही देगा। सूर्य ग्रहण दोपहर में तीन बजकर 26 मिनट पर आरंभ होगा और शाम में 7 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगा। सूर्य ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले आरंभ हो जाता है। ऐसे में सूर्यग्रहण का सूतक काल मध्य रात्रि तीन बजकर 26 मिनट पर आरंभ हो जाएगा। सूर्यग्रहण के दौरान मंदिरों में पूजा पाठ नहीं किया जाता है। वहीं सूर्यग्रहण के दौरान कोई भी मांगलिक कार्य जैसा शादी, पूजा, हवन, मुंडन आदि नहीं करना चाहिए। पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करना बहुत शुभ : नवीन शास्त्री जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि इस दिन व्रत, तर्पण, श्राद्ध और पवित्र नदियों में स्नान शुभ माना जाता है। भगवान शिव का अभिषेक और दान व पुण्य करने से सुख व समृद्धि मिलती है। मान्यता है कि इस दिन पूजा, पाठ और व्रत करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सुख व समृद्धि आती है। साथ ही इस दिन पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करना बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में देवी व देवताओं का वास होता है। इसलिए इस दिन स्नान करना बहुत पुण्यदायक माना गया है। इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए व्रत रखें और जरूरतमंद लोगों को दान दें।