जींद। हाइड्रोजन ट्रेन का इंजन वीरवार को जींद से चलकर भंभेवा गांव के रेलवे स्टेशन पर सुबह पहुंचा। टीम में 30 के करीब अधिकारी जांच कार्य कर रहे थे। अधिकारियों द्वारा रेलवे स्टेशन पर टेंट लगाया हुआ था। जिसमें सभी उच्च अधिकारी कंप्यूटर पर इंजन की पूरी तरह से जांच कर रही थे। अधिकारियों के अनुसार लगभग दो दिन पूरी तरह से इंजन की टेस्टिंग की जाएगी। कंप्यूटर व लैपटॉप से इंजन की जांच करने के बाद उसको करीब 12:30 बजे चालू किया गया। जिसके बाद आवाज इंजन से जायदा आ रही थी। उसके बाद इंजन को पूरी तरह से जांचा गया और अधिकारी दोबारा से इंजन की फ्रिक्वेंसी की जांच करने में लग गए।
गौरतलब है कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा में जींद से सोनीपत के बीच लगभग 90 किलोमीटर के मार्ग पर चलेगी। जो जींद, जींद सिटी, पांडु पिंडारा जंक्शन, भंभेवा, गोहाना जंक्शन, मोहाना और सोनीपत जंक्शन स्टेशनों को कवर करेगी। ट्रेन 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी और इसकी डिजाइन स्पीड 150 है। यह वर्तमान डीएमयू ट्रेन के दो घंटे के समय को घटा कर केवल एक घंटे में सफर पूरा करेगी। यह ट्रेन हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक का उपयोग करती है। इसमें डीजल या बिजली के बजाय हाइड्रोजन का उपयोग होता है। जिससे केवल पानी और भाप निकलती है ओर कोई हानिकारक धुआं नही निकलता है। यह ट्रेन 2600 से अधिक यात्रियों को एक बार में ले जा सकती है। इसमें आधुनिक सुविधाएं जैसे तापमान सेंसर, बायो टॉयलेट, वॉश बेसिन, एलईडी लाइट और स्लाइडिंग दरवाजे शामिल हैं। यह ट्रेन चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में तैयार की गई है और यह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। इस ट्रेन का किराया आम जनता के लिए बहुत किफायती होने की उम्मीद है। जो लगभग पांच रुपये से 25 रुपये के बीच हो सकता है। यह परियोजना भारत को जर्मनी, जापान और चीन जैसे देशों की सूची में शामिल करती है। जहाँ हाइड्रोजन ट्रेनें पहले से ही काम कर रही हैं।
डीजल इंजन की मदद से जंक्शन पर पहुंचा हाइड्रोजन ट्रेन का इंजन
वीरवार को जींद जंक्शन से डीजल इंजन की मदद से हाइड्रोजन ट्रेन के इंजन को भंभेवा लाया गया है। यहां तीन से चार दिन तक इंजन की ट्रायल होगी। साथ ही चेन्नई की मेधा कंपनी व दिल्ली से रेलवे कर्मचारी भी ट्रायल के लिए पहुंचे हैं। ऐेसे में अब उम्मीद है कि जल्द ही जींद-सोनीपत ट्रैक पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चल पाएगी। हाइड्रोजन इंजन को एक दूसरे डीजल इंजन से जोड़कर सुरक्षित तरीके से भंभेवा स्टेशन तक पहुंचाया गया। यह पूरी प्रक्रिया तय मानकों के तहत की गई ताकि किसी प्रकार की तकनीकी या सुरक्षा संबंधी परेशानी नहीं हो। ट्रायल के दौरान आसपास के रेलवे ट्रैक, सिग्नल व्यवस्था और स्टेशन परिसर की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर स्थानीय स्टाफ को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। रेलवे ने आम लोगों से भी अपील की है कि ट्रायल के समय रेलवे ट्रैक के आसपास न जाएं और नियमों का पालन करें। भंभेवा स्टेशन के आसपास अगले तीन से चार दिनों तक हाइड्रोजन ट्रेन इंजन का ट्रायल किया जाएगा। इस दौरान इंजन की गति, ब्रेकिंग सिस्टम, तकनीकी क्षमता और सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच की जाएगी। ट्रायल के समय रेलवे की तकनीकी टीम और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहेंगे और हर पहलू पर निगरानी रखेंगे।