हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों के बीच दिल्ली में एक और महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें लंबे समय से चले आ रहे पानी के विवाद पर बात हुई। इस बार माहौल पहले से कहीं ज़्यादा सकारात्मक और सहयोगात्मक रहा। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की बात को ध्यान से सुना और समाधान की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ने की इच्छा ज़ाहिर की।

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद बताया कि पिछली बार की तुलना में इस बार बात काफी आगे बढ़ी है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इसका अच्छा नतीजा निकल सकता है। उनका कहना था कि “अब हम समाधान के और क़रीब हैं।”

क्या है मामला?

हरियाणा और पंजाब के बीच पानी को लेकर वर्षों से मतभेद रहा है, खासतौर पर सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर को लेकर। हरियाणा चाहता है कि उसे न्यायोचित हिस्सा मिले, जबकि पंजाब की अपनी चिंताएं हैं। यह विवाद समय के साथ राजनीतिक रंग भी ले चुका है, लेकिन अब लग रहा है कि दोनों राज्य समाधान की ओर बढ़ना चाहते हैं।

बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री ने एक नया सुझाव रखा

पंजाब का नया प्रस्ताव

बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री ने एक नया सुझाव रखा – क्यों न पानी की समस्या का हल किसी वैकल्पिक योजना से निकाला जाए, जैसे कि किसी और नदी का पानी उपयोग में लाया जाए। इससे दोनों राज्यों को संतुलन बना रहेगा और विवाद भी सुलझ सकता है।

उन्होंने कहा कि पुराने विवाद को बार-बार दोहराने की बजाय, अब भविष्य की सोचनी चाहिए। उनका मानना है कि बातचीत से ही रास्ता निकलेगा और सभी को थोड़ा समझौता करना होगा।

13 अगस्त को अहम दिन

अब अगला कदम 13 अगस्त को उठाया जाएगा, जब दोनों राज्य सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखेंगे। इस बार दोनों सरकारें कोर्ट में समाधान पर फोकस करने वाली बातों को पेश करेंगी। इससे उम्मीद है कि कोर्ट भी इसे सुलझाने की दिशा में सकारात्मक पहल करेगा।

क्या मिला इस बातचीत से?

इस बार की बैठक में कोई ठोस फैसला तो नहीं हुआ, लेकिन सबसे बड़ी बात ये रही कि बातचीत में तनाव नहीं था। दोनों राज्यों ने मिल-बैठकर चर्चा की और अगली बार फिर मिलने की बात भी तय हुई। यह इशारा करता है कि दोनों ही सरकारें इस मुद्दे को सुलझाने के लिए गंभीर हैं।

निष्कर्ष

हरियाणा और पंजाब के बीच पानी का यह विवाद सालों पुराना है, लेकिन अब लग रहा है कि इसे बातचीत से हल करने की दिशा में दोनों राज्य एकजुट हो रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ सरकारों के स्तर पर नहीं बल्कि आम जनता के लिए भी राहत भरा संकेत है। अगर यही भावना बनी रही, तो जल्द ही इस लंबे विवाद का समाधान देखने को मिल सकता है।