सुनारिया जेल से रिहा होकर सिरसा डेरा पहुँचे
रोहतक, 5 अगस्त 2025:
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को हरियाणा सरकार ने 40 दिनों की पैरोल पर रिहा किया है। वे रोहतक की सुनारिया जेल में बलात्कार और हत्या के मामलों में सजा काट रहे थे। रिहाई के बाद उन्हें भारी पुलिस सुरक्षा के बीच सिरसा स्थित डेरे में ले जाया गया।
किन मामलों में दोषी हैं राम रहीम?
गुरमीत राम रहीम को 2017 में डेरा की दो साध्वियों के साथ बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया था। इसके अलावा 2019 में पत्रकार राम चंदर छत्रपति की हत्या में भी उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। साथ ही, दो अन्य हत्याओं के मामले में भी उन्हें दोषी ठहराया जा चुका है।
पूर्व में कितनी बार मिली रिहाई?
यह राम रहीम को मिली 14वीं पैरोल या फरलो है। इससे पहले भी उन्हें:
- जनवरी 2023 में 40 दिन की पैरोल
- अक्टूबर 2022 में 40 दिन की पैरोल
- फरवरी 2022 में 21 दिन की फरलो
जैसी कई अस्थायी रिहाइयाँ दी जा चुकी हैं। हर बार, इन रिहाइयों पर राजनीतिक उद्देश्य और वोट बैंक की राजनीति के आरोप लगते रहे हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आलोचना
राम रहीम की पैरोल अक्सर ऐसे समय पर दी जाती है जब हरियाणा या पंजाब में चुनाव या धार्मिक आयोजन होते हैं। डेरा सच्चा सौदा का विशेष प्रभाव विशेषकर हरियाणा, पंजाब और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में माना जाता है। विपक्षी दल अक्सर इन रिहाइयों को “राजनीतिक सौदा” करार देते हैं, जबकि सरकार इसे “कानूनी प्रक्रिया के तहत” लिया गया निर्णय बताती है।
कानूनी प्रक्रिया और शर्तें
हरियाणा जेल नियमों के अनुसार, कोई भी कैदी जो अच्छे आचरण का प्रदर्शन करता है और कुछ विशेष शर्तों को पूरा करता है, पैरोल के लिए आवेदन कर सकता है। राम रहीम की पैरोल भी इसी आधार पर स्वीकृत हुई है। हालांकि, हर बार उनकी रिहाई पर जन सुरक्षा, निष्पक्षता और न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
निष्कर्ष
गुरमीत राम रहीम की बार-बार हो रही पैरोल से यह मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है कि क्या न्याय व्यवस्था और प्रशासन ऐसे प्रभावशाली व्यक्तियों के प्रति समान रूप से कठोर रहते हैं? आने वाले दिनों में इस पर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया तय मानी जा रही है।
