करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद टिकाऊ नहीं
हरियाणा में सड़कों की मजबूती और क्वालिटी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हालात यह हैं कि अधिकांश सड़कें 20 एमएम की लेयर में बनाई जा रही हैं, जबकि उन पर ट्रैफिक का दबाव और हैवी लोड कहीं अधिक है। लिंक रोड पर तो स्थिति और भी गंभीर है। यहां भारी वाहनों की आवाजाही के चलते सड़कें समय से पहले ही टूटने लगती हैं। लोगों की शिकायत रहती है कि फील्ड स्टाफ के पास उनके सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं होता। सड़कों का जल्दी-जल्दी टूटना और बार-बार पैचवर्क की नौबत आना सीधे तौर पर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब ट्रैफिक का दबाव और लोड बढ़ रहा है तो सड़क डिज़ाइन भी उसी हिसाब से किया जाना चाहिए। फिलहाल जो निर्माण हो रहा है, वह ट्रैफिक के लोड के हिसाब से नहीं है, यही वजह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कें टिकाऊ नहीं रह पातीं।
कैथल ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा में यही स्थिति है। सड़कों की जल्द खराब हालत फील्ड अधिकारियों के लिए सिरदर्द और जनता के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है। अब जरूरत है कि विभाग के उच्च अधिकारी और मंत्री रणबीर सिंह गंगवा इस ओर गंभीरता से ध्यान दें और ट्रैफिक के अनुसार सड़क डिज़ाइन तैयार करवाएं।
जनता की अपेक्षा है कि मुख्यमंत्री, मंत्री और विभागीय उच्च अधिकारी इस मुद्दे पर जल्द कदम उठाएं ताकि सड़कों की गुणवत्ता में सुधार हो और लोगों को राहत मिल सके।
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विशेष कमेटी बनाकर हो सड़क डिजाइन की निगरानी
इस स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक है कि सरकार और विभागीय उच्च अधिकारी एक विशेष कमेटी का गठन करें। यह कमेटी सड़कों के डिजाइन कार्य, टेंडर प्रक्रिया और गुणवत्ता की गहन जांच करे। कोई ऐसा प्रावधान किया जाए कि माइनस में टेंडर न छूटे, ये सुनिश्चित किया जाए कि सड़को का निर्माण ट्रैफिक लोड के हिसाब से हो। कोई भी सड़क बिना ट्रैफिक सर्वे के न बनाई जाए।
जनता की अपेक्षा है कि मामले में त्वरित कार्रवाई हो ताकि आने वाले समय में टिकाऊ सड़कें बन सकें और लोगों को राहत मिले।
