चंडीगढ़ विजिलेंस विभाग भ्रष्टाचार से निपटने में कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। पुलिस कर्मी स्थानीय स्तर से होने के कारण शिकायतकर्ताओं को गोपनीयता और निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर भरोसा नहीं रहता। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि लोग शिकायत दर्ज करने से हिचकते हैं, जबकि सीबीआई में उन्हें निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद रहती है।
सूत्रों के अनुसार, 2023-2025 के बीच 37 शिकायतों में से केवल 7 पर जांच शुरू हुई और कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई। लंबित जांचों की संख्या भी बढ़ी है और कई मामले वर्षों से लंबित हैं। कर्मचारियों की कमी, अपर्याप्त संसाधन, और प्रक्रियात्मक देरी के चलते जांच समय पर पूरी नहीं हो पाती।
स्थानीय निकायों, जैसे कि म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में भर्ती घोटाले और कथित उगाही जैसे मामलों में आपसी संबंधों और दबाव के कारण शिकायतें दब जाती हैं। हेल्पलाइन जैसी पहलें प्रभावी नहीं हो पा रही हैं।
इसके विपरीत, सीबीआई अधिक सक्रिय दिखी है और 2023-2025 में 24 गिरफ्तारियां कीं, जबकि विजिलेंस विभाग ने सिर्फ 3 गिरफ्तारियां कीं। इससे विभाग की कम प्रभावशीलता स्पष्ट होती है।
चंडीगढ़ विजिलेंस विभाग को विश्वास बहाल करने, जांच प्रक्रिया तेज करने, गोपनीयता सुनिश्चित करने और शिकायतकर्ताओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में सुधार करने की आवश्यकता है। तभी भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई संभव होगी।