कृषि विज्ञान केन्द्र, अम्बाला आज पोषण अभियान एवं प्रशिक्षण का आयोजन गांव पिलखनी की आंगनवाड़ी में किया । इस कार्यक्रम में लगभग 20 आंगनवाडी वर्करज एवं ग्रामीण महिलाओं ने भाग लिया।  डा. उपासना सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान ने पोषण माह के महत्व एवं पोषण माह मनाने के उद्देश्य पर प्रकाश डाला । और खाना पकाते समय पोषक तत्वों को नष्ट होने से बचाने के तथ्यों पर प्रकाश डाला । उन्होने बताया कि 5 खाद्य वर्गों को प्रतिदिन खाने में इस्तेमाल करना आवश्यक है। क्योंकि हरेक खा़द्य वर्ग में विभिन्न पोषक तत्व मौजूद रहते हैं अगर इन पोषक तत्वों की कमी हो जाये तो विभिन्न प्रकार की बीमारियां हो सकती है। उदाहरणत: एनिमिया जो तकरीबन किशोरियों में लोह तत्व की कमी से होता है इसके लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, अनार, अमरूद का सेवन करना जरूरी होता है। गलघोंटू बीमारी आयोडिन की कमी से होती है अत: आयोडाइजड नमक खाने के लिए जागरूक किया जाता है। मजबूत हडिडयों एवं बढ़ते शरीर के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी है जो हम दूध, दही से पूरा कर सकते हैं इसी तरह विटामिन सी की कमी से दांतों, मसूडों में खून आना इत्यादि बीमारियों से बचने के लिए रसदार फल जैसे अनार, संतरा, मौसमी, नींबू, आंवला का प्रयोग करना चाहिए । हमें खाद्य पदार्थों का चुनाव और उनको पकाने की सही विधियों का भी ध्यान रखना चाहिए । मोटे अनाज खनिज तत्व, प्रोटीन व एन्टीआॅक्सीडेन्ट से भरपूर होते हैं जो डायबिटीज, हाईपरटेंशन व ह्दय रोगों से बचाने में मदद करते हैं। मोटे अनाज को खान-पान में बढ़ावा देने के लिये इनका उत्पाद जैसे बिस्कुट, केक, लडडू इत्यादि में मिश्रण किया जाना चाहिए जिसे हर आयु वर्ग के लोग इसका सेवन करने के लिए आकर्षित हो सकें।  डॉ रमेश कुमार, कृषि प्रसार विशेषज्ञ ने महिलाओ को सब्जिया इत्यादि को अपनी गृह वाटिका में लगाकर शुद्ध व् ताजा सब्जिया दैनिक उपयोग में लाने का आह्वान किया ।  काजल ने पोषण थाली का प्रदर्शन किया और अनाज आधारित पदार्थ, वसा एवं शर्करा, फल एवं सब्जियों, दूध से बने पदार्थ ,दालों , फलियों के उपयोग से होने वाले फायदों पर अपने विचार रखे और सभी का आभार व्यक्त किया ।  सुपरवाइजर  ममतेश ने महिलाओं के लिए सरकारी योजनाओं जैसे मातृ वंदना इत्यादि के बारे में जानकारी दी । परिवार में महिलाओं की भूमिका को अहम् बताते हुए कहा कि चार-पांच साल के बच्चे, किशोरी, गर्भवती महिलाओं एवं दूध पिलाने वाली माताओं की जिम्मेदारी भी हम सभी की है । सर्वे अनुसार पाया गया है कि 0-5 साल के बच्चों में 55-60 प्रतिशत अनिमिया की कमी है। जब बच्चे ही हमारे बीमारियों से ग्रसित होंगें तब स्वस्थ युवा कैसे होंगें। इसलिए हरी सब्जियां घर पर उगायें एवं ताजा व पौष्टिक आहार अपने परिवार को दें। साफ स्वच्छ तरीके से भोजन बनाने एवं मल्टीग्रेन आटे का दैनिक भोजन में उपयोग करने का भी आहवान किया ।