मनोवैज्ञानिक व साइकोथेरेपिस्ट डॉ कुलदीप सिंह ने कहा कि हर साल 10 सितंबर को मनाया जाने वाला यह दिन आत्महत्या रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। यह पहल अंतर्राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम संघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मिलकर की जाती है।
2025 का विषय
इस वर्ष तथा 2024-2026 की अवधि के लिए अभियान का विषय है: आत्महत्या पर दृष्टिकोण बदलना जिसका उद्देश्य आत्महत्या से जुड़ी गलत धारणाओं को चुनौती देना, कलंक को मिटाना और सहानुभूतिपूर्ण बातचीत को बढ़ावा देना है।
युवाओं में आत्महत्या के कारण और रोकथाम
आज के समय में आत्महत्या एक गंभीर सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। विशेषकर युवा वर्ग में इसका बढ़ता हुआ प्रतिशत चिंता का विषय है।
आत्महत्या के कारण
युवाओं में आत्महत्या के कई प्रमुख कारण देखे जाते हैं। शैक्षणिक दबाव -परीक्षा में असफलता या पढ़ाई का तनाव।
रोजगार की असुरक्षा -बेरोजगारी और भविष्य की चिंता।
परिवारिक विवाद -माता-पिता का झगड़ा, अत्यधिक अपेक्षाएँ या उपेक्षा।
संबंधों में असफलता -प्रेम संबंध टूटना या सामाजिक अस्वीकार्यता।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ -अवसाद, चिंता, नशे की लत, आत्मसम्मान की कमी।
सोशल मीडिया का प्रभाव झ्र तुलना, साइबर बुलिंग और अकेलेपन की भावना।
आत्महत्या की रोकथाम
आत्महत्या को रोका जा सकता है यदि समय पर सही कदम उठाए जाएँ। खुला संवाद -युवाओं को अपनी भावनाएँ साझा करने का अवसर देना। मानसिक स्वास्थ्य सहायता -काउंसलिंग, थेरेपी और समय पर इलाज। सकारात्मक वातावरण -परिवार और दोस्तों का सहयोगी रवैया।
शैक्षणिक और करियर मार्गदर्शन -तनाव को कम करने के लिए सही मार्गदर्शन।
जागरूकता अभियान -स्कूल, कॉलेज और समाज में मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा।
संकट में त्वरित मदद -हेल्पलाइन नंबर और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता।
निष्कर्ष
युवाओं में आत्महत्या का मुख्य कारण भावनात्मक और सामाजिक दबाव है। यदि परिवार, समाज और संस्थान मिलकर सहयोग दें और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए, तो आत्महत्या जैसी त्रासदी को काफी हद तक रोका जा सकता है। हमें हर युवा को यह संदेश देना चाहिए कि जीवन सबसे कीमती है और हर समस्या का समाधान है।
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर विशेष: मनोवैज्ञानिक व साइकोथेरेपिस्ट डॉ. कुलदीप सिंह ने विस्तार से दी जानकारी
