बरसात थमे चार दिन हो गए, लेकिन दशमेश नगर और जड़ौत रोड पर जलभराव की स्थिति जस की तस बनी रही। दो से तीन फुट तक खड़े पानी में परेशान लोग आखिरकार सोमवार को अपनी शिकायत लेकर बाहर आए। नाराज और आक्रोशित नागरिकों ने कहा कि उन्होंने बार-बार प्रशासनिक अधिकारियों और वार्ड प्रतिनिधियों से संपर्क किया, लेकिन कोई भी सुनवाई करने नहीं आया। इस बीच नगर निगम की महापौर शैलजा संदीप सचदेवा खुद मौके पर पहुंचीं और कॉलोनीवासियों की पीड़ा को सुना। महापौर ने पूरे जलभराव वाले क्षेत्र का दौरा कर समस्याओं का जायजा लिया। उन्होंने तुरंत निगम अधिकारियों से बातचीत कर पंप और जेसीबी लगवाने के आदेश दिए। महापौर ने कहा कि जलभराव की मुख्य वजह नालों पर अतिक्रमण और निकासी व्यवस्था की कमी है। उन्होंने दुकानदारों और लोगों से स्वयं अतिक्रमण हटाने की अपील की, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि जो अतिक्रमण हटाने में सहयोग नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय निवासियों ने महापौर के सामने रोष प्रकट करते हुए कहा कि सड़कें घरों से ऊँची बन जाने के कारण पानी उनके आंगनों में भर जाता है और उनकी दैनिक जीवनचर्या ठप हो जाती है। एक महिला निवासी ने कहा, “हमारे बच्चे चार दिन से स्कूल नहीं जा पाए, घर के भीतर पानी है और मच्छरों की भरमार हो गई है।” वहीं एक बुजुर्ग ने भावुक होकर कहा, “हम बूढ़े लोग कैसे इस पानी में निकलें, बीमारियाँ फैल रही हैं। अब आप आई हैं तो हमें उम्मीद है कि कुछ होगा। महापौर शैलजा ने मीडिया से कहा कि मुख्यमंत्री के नाम एक खुला पत्र लिखकर अवैध कॉलोनियों के विकास कार्यों को तकनीकी रूप से सही करने की मांग की गई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चंडीगढ़-अंबाला रोड पर मुख्य नालों की सफाई तत्काल की जाए और जहां आवश्यक हो, अतिक्रमण तोड़कर स्थायी निकासी की व्यवस्था बनाई जाए। महापौर ने पॉलिथीन के उपयोग को लेकर भी नागरिकों से जागरूकता की अपील की और चेतावनी दी कि पॉलिथीन प्रयोग करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी क्योंकि यह जलभराव और प्रदूषण की बड़ी वजह है।

