बालिकाओं के महत्व को समाज में स्थापित करने और लिंग भेदभाव को दूर करने के उद्देश्य से सिविल सर्जन डॉ. राकेश सहल के निदेर्शानुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान का संचालन डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. मुकेश कंडारा की देखरेख में हुआ, जिसमें जिला स्कूल हेल्थ की 10 मोबाइल टीमों ने दो महीने तक 262 केंद्रों पर विशेष गतिविधियां आयोजित कीं। डिप्टी सिविल सर्जन डॉक्टर बलजिंदर कौर ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं, अभिभावकों एवं समुदाय को बालिका के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा। टीमों ने अलग-अलग विद्यालयों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्थलों पर पहुंचकर लोगों को बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रमों में बताया गया कि बेटियों की पढ़ाई-लिखाई न केवल उनके व्यक्तिगत विकास के लिए बल्कि पूरे परिवार व समाज की प्रगति के लिए जरूरी है। अभियान के दौरान विशेषज्ञों ने किशोरियों के स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से जानकारी दी। बालिकाओं को संतुलित आहार, एनीमिया से बचाव, मासिक धर्म स्वच्छता और आत्मरक्षा जैसे विषयों पर प्रशिक्षित किया गया। इसके साथ ही समाज को संदेश दिया गया कि लिंग भेदभाव को हतोत्साहित करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है, ताकि समाज में वास्तविक लैंगिक समानता स्थापित हो सके। मोबाइल टीमों ने, स्लोगन, गीतों और संवाद सत्रों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने का कार्य किया। माता-पिता और समुदाय के सदस्यों को बालिकाओं के लिए सकारात्मक सोच अपनाने और उन्हें समान अवसर देने के लिए प्रेरित किया गया। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. मुकेश कंडारा ने बताया कि इस अभियान से जिले में व्यापक स्तर पर जागरूकता फैली है और लोगों के विचारों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर इस प्रकार के अभियान चलाकर समाज में बेटियों के महत्व और उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने का कार्य करता रहेगा।