श्री दिगम्बर जैन सभा (रजि.), अतिशय क्षेत्र अंबाला शहर द्वारा दसलक्षण पर्व के अंतर्गत चिंतामणि भगवान श्री पार्श्वनाथ एवं माता पद्मावती संकीर्तन का भव्य आयोजन किया गया, जिसके उपरांत मंगल आरती सम्पन्न हुई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन एवं जैनत्तर समाज के श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। अतिशय क्षेत्र अंबाला शहर जैन धर्म का एक प्राचीन एवं ऐतिहासिक तीर्थ क्षेत्र है। यहाँ लगभग 2200 वर्ष प्राचीन भगवान वासुपूज्य एवं भगवान पार्श्वनाथ माता पद्मावती की अद्भुत प्रतिमाएँ विराजमान हैं, जो सन् 1975 में भूगर्भ से प्रकट हुई थीं। इन प्रतिमाओं का अतिशय जन-जन में प्रसिद्ध है। श्रद्धालु दूर-दूर से यहाँ आकर अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं और क्षेत्र की पावन वायु से आत्मिक शांति प्राप्त करते हैं। इसी क्रम में दसलक्षण पर्व के अंतर्गत उत्तम मार्दव एवं उत्तम आर्जव पर्व भी श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मनाए गए। उत्तम मार्दव (उत्तम विनम्रता) झ्र यह पर्व हमें अहंकार त्याग कर विनम्रता, सरलता और सौम्यता को जीवन में अपनाने का संदेश देता है। जैन दर्शन के अनुसार मार्दव का भाव आत्मा को कोमल और दर्प-रहित बनाता है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। उत्तम आर्जव (उत्तम सरलता/सत्यनिष्ठा) यह पर्व मन, वचन और कर्म में सीधाई एवं पवित्रता की प्रेरणा देता है। आर्जव का पालन करने वाला व्यक्ति छल, कपट और दुराव से मुक्त होकर सत्य एवं नैतिकता के पथ पर अग्रसर रहता है।  सभा के उपाध्यक्ष श्री अभय जैन ने बताया कि दसलक्षण पर्व आत्मशुद्धि और आत्मचिंतन का पर्व है, जो प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर झाँकने और जीवन में धर्ममूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि अंबाला का यह अतिशय क्षेत्र केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि समस्त समाज के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र है। इसी सेवाभावी भावनाओं के अंतर्गत श्री दिगम्बर जैन सभा अतिशय क्षेत्र अंबाला शहर द्वारा सिविल अस्पताल अंबाला शहर में लगभग 300 भर्ती मरीजों एवं अतिरिक्त ओपीडी रोगियों को फल वितरण किया गया। सभा ने सभी मरीजों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की मंगलकामना व्यक्त की।