मराठा आरक्षण के मुद्दे पर मनोज जारंगे के नेतृत्व में मुंबई में होने वाले प्रदर्शन को रोकने में महाराष्ट्र सरकार नाकाम होती दिख रही है। जरांगे ने गणेश उत्सव के मद्देनजर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ओएसडी द्वारा आंदोलन स्थगित करने के अनुरोध को ठुकरा दिया है। विशेष कार्य अधिकारी राजेंद्र साबले पाटिल ने मंगलवार को जालना जिले के अंतरवाली सारथी गांव में जारंगे से मुलाकात की। उन्होंने जारंगे से प्रस्तावित आंदोलन स्थगित करने का अनुरोध किया। साथ ही उनसे मुंबई पहुंचने के लिए प्रदर्शनकारियों द्वारा अपनाए जाने वाले रोडमैप को साझा करने को कहा। पाटिल ने संवाददाताओं से कहा कि मैंने पहले जारंगे से फोन पर बात की थी। मैं आज उनसे मिलने आया और मुंबई पहुंचने के रास्ते के बारे में पूछा। मैंने उनसे अनुरोध किया कि क्या वे आंदोलन स्थगित कर सकते हैं, क्योंकि गणेशोत्सव है। जरांगे इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी मांग है कि सभी मराठों को कुनबी (ओबीसी श्रेणी में शामिल एक कृषक जाति) के रूप में मान्यता दी जाए, जिससे वे शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के पात्र बन सकें। गणेश उत्सव में नहीं डालेंगे खलल जरांगे ने कहा कि हमने दो साल इंतजार किया। भाजपा विधायक सुरेश धास मेरे पिछले अनशन के दौरान मिलने आए थे और कोटा मुद्दे पर फैसला लेने के लिए तीन महीने का समय मांगा था। अगर सरकार मराठों को ओबीसी आरक्षण देती है, तो हम देवेंद्र फडणवीस के दोस्त बन जाएंगे। अगर हमें आरक्षण मिलता है तो हम मुंबई नहीं जाएंगे, वरना हम जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी गणेश उत्सव समारोह में खलल नहीं डालेंगे। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह प्रदर्शनकारियों को आजाद मैदान पहुंचने के लिए एक समर्पित मार्ग आवंटित करे। ओबीसी सदस्यों ने प्रदर्शन किया भाजपा की ओबीसी शाखा के सदस्यों ने मंगलवार को चंद्रपुर में मराठा नेता मनोज जरांगे के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मराठों को ओबीसी समूह में शामिल करने की जरांगे की मांग को असंवैधानिक बताया। महाराष्ट्र भाजपा ओबीसी शाखा के उपाध्यक्ष अशोक जीवतोड़े ने कहा कि हम उन मराठा परिवारों को कुनबी प्रमाण पत्र देने के खिलाफ नहीं हैं, जिनके रिकॉर्ड सत्यापित हैं, लेकिन हम मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में आरक्षण देने का हमेशा विरोध करेंगे।