विश्व फर्स्ट एड दिवस के अवसर पर रेड क्रॉस भवन में शनिवार को प्राथमिक सहायता का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 150 युवक-युवतियों को प्राथमिक सहायता के महत्व व जरूरत के बारे में अवगत करवाते हुए दुर्घटनाग्रस्त व बीमार व्यक्तियों की सहायता करने व पर्यावरण सुरक्षा हेतु प्रेरित करते हुए शपथ दिलवाई गई।
रेड क्रॉस सचिव गौरव राम करण ने बताया कि प्रतिवर्ष सितम्बर माह के दूसरे शनिवार को विश्व भर में विश्व फर्स्ट एड दिवस मनाया जाता है।
इस थीम के साथ इस वर्ष का फोकस इस तात्कालिक आवश्यकता पर है कि समुदाय जलवायु से जुड़ी आपात स्थितियों जैसे बाढ़, लू और जंगल की आग इत्यादि के लिये तैयार रहे, जहां प्राथमिक उपचार का ज्ञान जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकता है।
उन्होनें बताया कि विश्व प्राथमिक सहायता दिवस अंतराष्ट्रीय दिवस है, जिसका उदेश्य जीवन बचाने व दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों को सहायता पहुंचाने बारे जागरूकता फैलना है।
प्रशिक्षण अधिकारी। हरमेश चन्द ने कहा कि  प्रत्येक व्यक्ति को प्राथमिक सहायता का ज्ञान होना आवश्यक है। दुर्घटना के समय यदि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को सही प्राथमिक सहायता मिल जाए तो उसे बचाया जा सकता है। यदि दुर्घटना के दौरान किसी व्यक्ति की श्वास व धड़कन बंद हो जाये तो प्राथमिक सहायक उसे सी.पी.आर. देकर पुनः चालू किया जा सकता है और हस्पताल पहुंचाया जा सकता है, जिससे उसके जीने की संभावना बढ़ जाती है। यदि प्रत्येक व्यक्ति प्राथमिक सहायता के प्रति जागरूक हो जाये तो दुर्घटना के कारण होने वाली मूत्यु दर को कम किया जा सकता है और बहुमूल्य जिंदगियों को बचाया जा सकता है।
उन्होनें कहा कि हमें जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयार रहना चाहिए ताकि जरूरत के समय सही प्राथमिक उपचार प्रदान करके अमूल्य जिंदगियों को बचाया जा सके।
इस अवसर पर प्रतिभागियों को सी.पी.आर. विधि को प्रैक्टीकल डैमो करके दिखया गया, जिसे प्रतिभागियों ने बड़े चाव से सीखा।  
इस अवसर पर प्रतिभागियों को हड़ी टूट, बेहोशी, गला घूटना, रक्तस्राव इत्यादि के कारणों तथा प्रदान की जाने वाले प्राथमिक सहायता और रोगी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने वाली विधियों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
इस अवसर पर  प्रतिभागियों को दुर्घटनाग्रस्त व बीमार व्यक्तियों की सहायता तथा पर्यावरण सुरक्षा बारे शपथ भी दिलवाई गई।